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7 करोड़ 40 लाख रुपए खर्च किए, फिर भी उद्धार के लिए बाट जोह रही ‘चीलर’

 

– दो किमी क्षेत्र में 6 घाट का होना था सौंदर्यीकरण, नगर पालिका ने एक स्थान पर किया काम और कर ली इतिश्री
शाजापुर। जब 19 करोड़ का प्रस्ताव भोपाल भेजा था तो लगा था कि चीलर नदी फिर से पुराने स्वरूप में लौट आएगी, लेकिन भोपाल से 7 करोड़ 40 लाख ही स्वीकृत किए गए। अधूरा काम स्वीकृत होने के बाद नगर पालिका के जिम्मेदारों ने इस अधूरे काम में से भी अधूरा काम करवाकर इतिश्री कर ली। जिससे करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी चीलर नदी बड़े गंदे नाले की तरह है।
ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब चीलर नदी के पानी में उपर से ही तलहटी दिखती थी। लोग यहां नहाते, कपड़े धोते थे। युवा नदी में तैराकी प्रतियोगिता करते थे। जगह-जगह नदी के किनारों पर लगे हुए बरसों पुराने पेड़ से नदी में गोता लगाने के ठिये बने हुए थे, लेकिन जब से शहर विकास की बातें हुई तब से इसका स्वरूप बदल गया। शहर के छोटे-बड़े मिलाकर 18 गंदे नालों का पानी 24 घंटे नदी में मिलता है। इससे ये बड़ा नाला हो गई है। करीब चार साल पहले इसके उद्धार के लिए 19 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर नगर पालिका ने स्वीकृति के लिए भेजा था। जिसमें नदी के दोनों ओर बड़े नाले बनाकर इसमें मिलने वाली गंदगी को सीधे शहर से बाहर किया जाना था, लेकिन वरिष्ठ स्तर से केवल नदी की घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ 40 लाख रुपए की ही स्वीकृति दी गई। ऐसे में आज भी नदी में गंदे नालों का पानी मिल रहा है।
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गंदे नालों को हटाने के लिए नहीं मिली थी स्वीकृति
चीलर नदी की सफाई के लिए पूर्व के वर्षो में अनेक बार प्रशासनिक स्तर पर प्रयास हुए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। बाद मेें नदी की पूरी सफाई एवं सौंदर्यीकरण के लिए 19 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार करके भोपाल स्वीकृति के लिए भेजा गया था। इस प्रोजेक्ट में मां राजराजेश्वरी मंदिर परिसर के पास से बादशाही पुल तक नदी को संवारा जाना तय किया गया था। इसके तहत 6 घाट के साथ साइकिलिंग ट्रैक और फूड जोन का निर्माण होना था। शुरुआती दौर में भीमघाट, गरासिया घाट, महादेव घाट और महूपुरा क्षेत्र में नए घाट बनाए जाने का प्रस्ताव इसमें शामिल किया गया था। इसके अतिरिक्त दो घाट अलग से बनाए जाना थे। वहीं नदी मेें मिल रही गंदगी को दूर करने के लिए नदी के दोनों ओर नाले का निर्माण किया जाना था। इस प्रस्ताव को भोपाल भेजने पर संबंधितों ने इसमें से गंदे पानी की निकासी के लिए नदी के दोनों किनारों पर नाले निर्माण को हटा दिया। सिर्फ घाट निर्माण व सौंदर्यीकरण के लिए ही शासन ने मंजूरी दी थी। यानी 7 करोड़ 40 लाख रुपए खर्च होने के बाद भी नदी में शहर के गंदे नालों का पानी मिलता रहने की योजना को स्वीकृति मिली थी। इस पर काम हुआ, लेकिन नदी साफ नहीं हुई।
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कुछ काम हुए, कुछ पर नहीं बढ़ी प्रक्रिया
चीलर नदी के सौंदर्यीकरण के लिए जो प्रक्रिया शुरू हुई थी उसमें से कुछ काम तो हुए, लेकिन कुछ काम आगे हीं नहीं बढ़े। इसमें 6 अलग-अलग घाटों का लाल पत्थर लगाकर सौंदर्यीकरण किया जाना था। 4 घाट पर काम हुआ, लेकिन 2 घाट कौन से है ये नहीं पता। घाटों के पास नदी किनारों पर शहरवासियों को टहलने के लिए पैदल ट्रैक बनाया जाना था। इसमें महुपुरा रपट के समीप ट्रेक बनाया, लेकिन अन्य किसी घाट पर व्यवस्था नहीं हुई। ओंकारेश्वर मंदिर के समीप बच्चों के लिए पार्क बनाया बनाया गया। नदी किनारों पर साइकिल ट्रैक बनाया जाना था, लेकिन ये कहीं नहीं बनाया। पेड़-पौधों वाले क्षेत्रों में शहरवासियों व बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले आदि लागाए जाना थे, लेकिन ये काम भी अधूरा रहा।
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नमामी गंगे प्रोजेक्ट से उम्मीद
कुछ समय पहले कलेक्टर किशोर कन्याल ने चीलर नदी के एक दिवसीय सफाई महाअभियान का आयोजन किया। इसमें राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक सहित अन्य संगठनों, नगर के गणमान्यजनों, आमजन व शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के सहयोग से महाअभियान चलाया। इसमें सैकड़ों टन कचरा नदी से निकाला गया। हालांकि इस अभियान से वांछित सफलता नहीं मिल पाई। ऐसे में नदी की पूरी तरह सफाई करवाने और इसका स्वरूप निखारने के लिए कलेक्टर कन्याल ने नमामी गंगे प्रोजेक्ट में इसे शामिल करवाने के लिए प्रयास शुरू किए। इसके लिए कलेक्टर द्वारा नगर पालिका को निर्देश जारी करके डीपीआर तैयार करने को कहा है। डीपीआर को स्वीकृति के लिए आगे भेजा जाएगा। ताकि इस पर स्वीकृति मिली तो नदी का उद्धार हो जाएगा।
इनका कहना है
चीलर नदी को नमामी गंगे प्रोजेक्ट में शामिल करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नगर पालिका से इसके लिए डीपीआर तैयार करवाई जाकर भेजा जाएगा। यदि स्वीकृति मिलती है तो हेरिटेज साइट की तरह चीलर नदी का विकास होगा। जिससे इसका स्वरूप निखर जाएगा।
– किशोर कन्याल, कलेक्टर-शाजापुर
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रिपोर्टर किशोर सिंह राजपूत

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