महाराष्ट्र के सभी पुलिस आयुक्त कार्यालयों में तीन नए अपराधीक कानून लागू करने पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आदेश

रिपोर्टर-संजय मस्कर
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आदेश दिया है कि महाराष्ट्र के सभी पुलिस आयुक्त कार्यालयों में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए जाएं और महाराष्ट्र सरकार को नए आपराधिक कानून के अनुसार अभियोजन निदेशालय स्थापित करना चाहिए। महाराष्ट्र में आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। वह उस समय बोल रहे थे। इस बैठक में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस उपस्थित थे।
बैठक में राज्य में पुलिस, जेल, न्यायालय, मुकदमेबाजी और फोरेंसिक विज्ञान से संबंधित विभिन्न नये प्रावधानों के कार्यान्वयन और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। शाह ने निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री को राज्य में नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन की द्वि-साप्ताहिक समीक्षा करनी चाहिए, जबकि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को साप्ताहिक समीक्षा करनी चाहिए। शाह ने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपराध दर्ज करना जरूरी है, इसलिए एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए।
भारतीय न्यायिक संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने क्रमशः औपनिवेशिक भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 का स्थान ले लिया है। ये नये कानून पिछले वर्ष 1 जुलाई को लागू हुए।
सात वर्ष से अधिक की सजा वाले मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक की दोषसिद्धि दर सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए, तथा पुलिस, सरकारी अभियोजकों और न्यायपालिका को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों को यथाशीघ्र सजा मिले।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को संगठित अपराध, आतंकवाद और भीड़ द्वारा हत्या के मामलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि अपराध से संबंधित धाराओं का दुरुपयोग रोका जा सके।
जेलों, सरकारी अस्पतालों, बैंकों, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (एफएसएल) आदि जैसी सुविधाओं में दृश्य माध्यम के माध्यम से साक्ष्य को संरक्षित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
एक ऐसी प्रणाली लागू की जानी चाहिए जिसके तहत अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से एफआईआर को दो राज्यों के बीच स्थानांतरित किया जा सके।
जेलों, सरकारी अस्पतालों, बैंकों, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (एफएसएल) आदि जैसी सुविधाओं में दृश्य माध्यम के माध्यम से साक्ष्य को संरक्षित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
एक ऐसी प्रणाली लागू की जानी चाहिए जिसके तहत अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से एफआईआर को दो राज्यों के बीच स्थानांतरित किया जा सके।
प्रत्येक पुलिस उप-मंडल में फोरेंसिक साइंस मोबाइल वैन की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार को राज्य की ‘फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली’ को राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली से जोड़ना चाहिए।