सूरजपुर में अवैध लकड़ी तस्करी का सिलसिला: प्रशासन की निष्क्रियता और तस्करों के बढ़ते हौसले पर उठे सवाल

रिपोर्टर ओपी सिंह
सूरजपुर, 28 फरवरी:
सूरजपुर जिले में इन दिनों उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लकड़ी तस्करों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जो यूकेलिप्टस के नाम पर नीम, आम, बबूल, सेमर सहित अन्य पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहा है। इस अवैध गतिविधि के बावजूद जिला प्रशासन और राजस्व अमला निष्क्रिय नजर आ रहा है, और तस्करों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि तस्करों के साथ राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ है, जो इस अवैध कटाई को बढ़ावा दे रहे हैं।
*राज्य सरकार के अभियान के विपरीत अवैध कटाई जारी*
राज्य सरकार “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधरोपण के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है, लेकिन सूरजपुर जिले में बाहरी राज्यों के तस्करों द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
*ओवरलोड ट्रैक्टरों की तस्करी और प्रशासन की चुप्पी*
जिले के कई क्षेत्रों में तस्कर दिन के उजाले में भी ओवरलोड ट्रैक्टरों का उपयोग कर लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं, जिनकी नंबर प्लेट तक नहीं होती। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायतों में तस्करों ने लकड़ी का अवैध भंडारण किया है और इन्हें बड़े ट्रकों में लोड करके रात के समय या सुबह के अंधेरे में अन्य राज्यों में भेजा जाता है।
स्थानीय नागरिकों का प्रशासन पर आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है, इसके बावजूद प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है, जिससे यह लगता है कि प्रशासन तस्करों के दबाव में काम कर रहा है और उन्हें अवैध कटाई करने की खुली छूट दी जा रही है। कुछ स्थानीय नेताओं की संलिप्तता भी सामने आई है, जो तस्करों को संरक्षण दे रहे हैं।
नागरिकों की सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि तस्करों के बनाए गए अवैध डिपो में छापेमारी कर उन्हें सील किया जाए और तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
*बिना दस्तावेज़ के बाहरी लोग तस्करी में संलिप्त*
ग्राम पंचायतों में उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लकड़ी तस्करों के कई गिरोह बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे हैं। इन लोगों ने किराए पर कमरे लेकर लकड़ी तस्करी का कारोबार शुरू किया है, लेकिन पुलिस प्रशासन इनकी जांच नहीं कर रहा और न ही मुसाफिरी दर्ज की गई है। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
*अवैध डिपो और सुरक्षा खतरों का बढ़ता सिलसिला*
तस्करों द्वारा पेड़ों की अवैध कटाई के बाद लकड़ी को भंडारण करने के लिए किराए की भूमि पर अवैध डिपो बनाए गए हैं। इन डिपो में ट्रैक्टरों के माध्यम से लकड़ी लाई जाती है और फिर ट्रकों के द्वारा अन्य राज्यों में भेजी जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है।
वन विभाग की सख्त कार्रवाई की उम्मीद
वन क्षेत्राधिकारी उमेश वस्त्रकार ने कहा कि एसडीओ और अनुविभागीय अधिकारी द्वारा इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अब पेड़ों की कटाई के लिए एसडीएम कार्यालय से अनुमति प्राप्त करनी होगी और बिना अनुमोदन के पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अवैध डिपो पर कार्रवाई की जा रही है और बीती रात एक ट्रक और ट्रैक्टर को जब्त किया गया है।
निष्क्रिय प्रशासन और बढ़ती तस्करी
यह मामला प्रशासन की निष्क्रियता और तस्करों के बढ़ते हौसले को उजागर कर रहा है, जिससे नागरिकों में चिंता का माहौल है।