
रिपोर्टर – सतीश सिंह
जिगना। क्षेत्र के पाली गांव में आयोजित रामलीला में सीता स्वयंवर का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा शिवधनुष तोड़ने और माता सीता के वरमाला पहनाने के प्रसंग ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। शिवधनुष टूटते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय दर्शक उपस्थित रहे।
श्रीराम ने तोड़ा शिवधनुष, माता सीता ने पहनाई वरमाला रामलीला के मंचन में राजा जनक के दरबार में आयोजित सीता स्वयंवर का दृश्य प्रस्तुत किया गया। स्वयंवर में अनेक राजा-महाराजा पहुंचे, जिनमें बाणासुर और रावण भी शामिल थे। सभी ने भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठाने और तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका।
इसके बाद गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम ने शिवधनुष को तोड़ दिया। धनुष टूटते ही पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इसके पश्चात माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उनका वरण किया। इस दृश्य पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रभावशाली मंचन टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम राजा जनक के दरबार में पहुंचे। इसके बाद भगवान परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए संवाद का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया। संवाद के दौरान कलाकारों के अभिनय और प्रस्तुतिकरण ने दर्शकों को आकर्षित किया।
रामलीला में राजा जनक की भूमिका सोनू तिवारी, भगवान श्रीराम की भूमिका वेद, लक्ष्मण की भूमिका समर, गुरु विश्वामित्र की भूमिका सोनू तिवारी, बाणासुर की भूमिका अंकित तिवारी, रावण की भूमिका अनुज, बंदीजन की भूमिका राजन तथा भगवान परशुराम की भूमिका पवन तिवारी ने निभाई। सभी कलाकारों के जीवंत अभिनय को दर्शकों की खूब सराहना मिली।
छह दशक से अधिक समय से निभा रही धार्मिक परंपरा श्रीकृष्ण तिवारी बिड़ला के निर्देशन में रामलीला समिति पाली द्वारा पिछले 60 वर्षों से अधिक समय से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। समिति की यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रामलीला के मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय दर्शक पहुंचे। धार्मिक प्रसंगों की आकर्षक प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।









