
रिपोटर सुवीर कुमार त्रिपाठी
देश की युवा पीढ़ी का अग्रेजी भाषा के प्रति बढ़ता मोह ही समाज व देश के लिए नुकसान दायक हैं ।उन्होंने आगे कहा कि
अग्रेजी से आई ए एस , पीसीएस ,इंजीनियर तो बन सकते हो ,किन्तु मानव जीवन का जो मूल उद्देश्य शांति की प्राप्ति सम्भव नही है
उन्होंने कहा कि विदेशों में युवा पीढ़ी संस्कृत , गीता ,उपनिषद पढ़ रहे । जबकि हमारे देश मे देववाणी का पठन पाठन दिनों दिन कम होता जा रहा है । बच्चे अपनी हिंदी भाषा पर ही लज्जित महसूस कर रहे हैं।जो एक चिन्तनीय विषय है ।देश व प्रदेश की सरकारें भी इस ओर कम रुचि ले रही हैं । जो देश के लिए अमंगलकारी हैं । श्री त्रिपाठी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जब तक संस्कृत भाषा का संरक्षण व सम्वर्धन नही होगा । हम देश को विश्व गुरु बनाने की परिकल्पना भी नही कर सकते । उन्होंने कहा कि विदेशी भाषाओं में व्यक्ति वाद ,एकाकीपन ,स्वार्थपरता ,आदि सोच जन्म लेती हैं जबकि देववाणी भाषा मे सदैव विश्व बन्धुत्य की भावना जागृत होती हैं ।इसके लिए प्रबुद्ध वर्ग के लोगो को आगे आना चाहिए । उन्होंने कहा कि राजनैतिक दलों की स्वार्थ , जाति पाती ,व वोट जुगाड़ू नीति के चलते देश का माहौल खराब चल रहा है । जो युवा पीढ़ी को विषमय बना रहा हैं ।









