
संवाददाता – जाबिद अली जावेद
बालाघाट। आत्मा (कृषि तकनीकी एवं प्रबंधन परियोजना) द्वारा 30 अगस्त को विकासखंड खैरलांजी की ग्राम पंचायत मोहगांवघाट में कृषक संगोष्ठी एवं राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बालाघाट–सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती भारती पारधी मुख्य अतिथि तथा विधायक श्री गौरव सिंह पारधी अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। जनपद अध्यक्ष श्रीमती आशु गुनाराम बघेले, जिला पंचायत सदस्य श्री प्रकाश उके, सभापति जनपद पंचायत खैरलांजी श्री आलोक पाटिल, श्रीमती दिपेश्वरी लिल्हारे, श्री ज्ञानेश राहंगडाले, श्री राजेंद्र देशमुख, श्री दुर्गेश पारधी, सरपंच मोहगांवघाट तथा अन्य जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
सांसद श्रीमती भारती पारधी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों को प्राकृतिक खेती हेतु प्रोत्साहित कर रहे हैं। किसान अपने घर पर ही जैविक खाद एवं कीटनाशक तैयार करें तथा रासायनिक उर्वरकों का न्यूनतम प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती हमारी प्राचीन परंपरा है और इसके लिए पशुपालन अनिवार्य है। पशुपालन से गोबर की खाद के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन भी बढ़ेगा। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से अन्न प्रदूषित हो रहा है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं। इससे बचने का एकमात्र उपाय प्राकृतिक खेती है, जिससे आने वाली पीढ़ी को भी स्वस्थ भविष्य मिलेगा।
सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये सीधे उनके खाते में मिल रहे हैं। पहले ऐसा संभव सोचना भी कठिन था। हाल ही में किसानों को फसल बीमा की दावा राशि का भुगतान भी किया गया है।
विधायक श्री गौरव सिंह पारधी ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारें किसानों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएँ चला रही हैं। प्राकृतिक खेती के साथ ही मजदूरों की कमी को दूर करने हेतु आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. उत्तम बिसेन ने धान की फसल में प्रमुख कीट-व्याधियों के प्राकृतिक उपचार बताए। डॉ. पूजा गोस्वामी ने खरपतवार नियंत्रण पर जानकारी दी, जबकि डॉ. श्रीवास्तव ने वर्तमान कृषि समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बुनियादी जानकारियाँ साझा कीं। श्री संघर्ष लांजेवार ने जीवामृत बनाने की विधि विस्तार से समझाई और व्यवहारिक प्रदर्शन भी किया। श्री आर.पी. मर्सकोले ने बीज व जैविक खाद उत्पादन तथा सौर प्रकाश फंदे के उपयोग पर चर्चा की।
इस अवसर पर एक हितग्राही को कस्टम हायरिंग अनुदान के रूप में 10 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया।









