
रिपोर्टर : सूर्यकांत तळखंडे
सावनेर। तहसील के पंढरी (ज.) स्थित विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर प्रांगण में गुड़ी पड़वा से राम नवमी तक आयोजित अखंड हरिनाम संकीर्तन समारोह एवं ज्ञानेश्वरी पारायण कार्यक्रम का श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह आयोजन गांव के युवाओं के नेतृत्व और समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ 19 मार्च 2026, गुरुवार को कलश पूजन और ग्रंथ पूजन के साथ हुआ। ज्ञानेश्वरी पारायण कथा का वाचन व्यासपीठाचार्य ह.भ.प. ईश्वर महाराज गुर्वे द्वारा किया गया। नौ दिनों तक चले इस आयोजन में प्रतिदिन प्रातः काकड़ा आरती एवं भजन, दिन में ज्ञानेश्वरी पारायण तथा सायंकाल हरिपाठ और रात्रि में हरिकीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति भाव से ओतप्रोत रहा।
प्रवचन और कीर्तन से मिला आध्यात्मिक संदेश
समारोह के दौरान विभिन्न कीर्तनकारों ने अपने प्रवचनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश प्रदान किए। प्रमुख रूप से विलास महाराज बनाईत, प्रमोद महाराज पानबुड़े, आशीष महाराज घटाटे, खुशाल महाराज वैद्य (भारुड़), कुमारी श्रद्धा वानखेड़े, निलेश महाराज लोपघाडणे, देविदास महाराज डोबले और नारायण महाराज शिंदे ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।
गायन एवं वादन मंडलियों ने भी अपनी कला से कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।
पालकी यात्रा और महाप्रसाद के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन 27 मार्च 2026, शुक्रवार को उत्साहपूर्वक किया गया। समापन दिवस पर प्रातः भव्य पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें गांव के महिला, पुरुष एवं युवाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
इसके पश्चात ह.भ.प. धर्माचार्य श्री नारायण महाराज शिंदे द्वारा कीर्तन प्रस्तुत किया गया।
अंत में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
ग्राम एकता और आस्था का सुंदर उदाहरण
पूरे आयोजन के दौरान पंढरी क्षेत्र की विभिन्न भजन मंडलियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। यह कार्यक्रम गांव की एकता, सांस्कृतिक परंपरा और धार्मिक आस्था का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।









