
रिपोर्टर नारायण मारु भट्ट साहब
विधिक सेवा संस्था द्वारा निर्दोष को बिना स्वार्थ दिलाया गया न्याय
धार न्यायालय ने धारा 498-ए दहेज उत्पीड़न मामले में लगभग चार वर्ष तक चली मुकदमेबाजी के बाद आरोपी पति को दोषमुक्त कर दिया। आरोपी दिनेश भेरूलाल कुमावत ग्राम पिपलखुंटा, जिला रतलाम निवासी को धार न्यायालय द्वारा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा एवं मारपीट से संबंधित धारा 294, 323, 506 आदि में दोषमुक्त किया गया। यह निर्णय प्रकरण क्रमांक RCT2015/2022 में दिनांक 28/08/25 को न्यायिक दंडाधिकारी श्रीमती बार्बी जुनेजा अग्रवाल की अदालत से दिया गया। आरोपी दिनेश ने बताया कि वह लगभग 4 से 5 वर्षों से मानसिक प्रताड़ना झेल रहा था। इसके कारण उसका कामकाज भी प्रभावित हुआ और लगातार पेशी पर जाने से आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। इस परिस्थिति में उसने विधिक निशुल्क सहायता के विषय में जानकारी ली और संस्था से सहायता प्राप्त की। लीगल एंड डिफेंस काउंसिल कार्यालय के चीफ़ लीगल एड डिफेंस श्री सतीश ठाकुर के मार्गदर्शन एवं अधिवक्ता रुबीना बानो शाह असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस की पैरवी से उसे न्याय प्राप्त हुआ। दिनेश ने बताया कि उसकी शादी कुछ वर्ष पूर्व धार जिले के दसई में हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद पत्नी के व्यवहार में बदलाव आया। इस पर उसने अपने सास-ससुर को समझाने का प्रयास किया, जिसके बाद पत्नी अपने माता-पिता के साथ अलग रहने लगी। तत्पश्चात पत्नी व उसके परिजनों ने मिलकर धार महिला थाने में दहेज उत्पीड़न व मारपीट की झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी। इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा। आरोपी ने अपने बचाव हेतु सबूत एकत्रित करना प्रारंभ किया और उन्हीं सबूतों के आधार पर न्यायालय ने उसे निर्दोष मानते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि दहेज उत्पीड़न व क्रूरता के अस्पष्ट आरोपों के आधार पर आरोपी को 4 से 5 वर्षों तक कानूनी प्रक्रियाओं में घसीटा गया, किंतु शिकायतकर्ता पत्नी द्वारा न्यायालय में उत्पीड़न के कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि धारा 498-ए के अंतर्गत अपराधों में कई बार पत्नियों द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से आरोप लगाकर पति व उसके परिवार को फंसाया जाता है, जिससे अनेक परिवार बर्बाद हो रहे हैं। यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इस पूरे मामले की जानकारी विधिक सहायता धार की अधिवक्ता रुबीना बानो शाह ने दी।









