
भोपाल। आज विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जा रहा है। फिजियोथेरेपी एक ऐसी आधुनिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें बिना दवा और सर्जरी के रोगों का उपचार किया जाता है। विशेष प्रकार के व्यायाम और तकनीकों की मदद से मांसपेशियों को सक्रिय बनाया जाता है, जिससे शरीर लचीला बनता है और अनेक बीमारियों से बचाव संभव होता है।
तनाव और दर्द में असरदार उपचार
फिजियोथेरेपी मानसिक तनाव, घुटनों के दर्द, कमर दर्द और रीढ़ की समस्याओं में बेहद लाभकारी है। आज के दौर में जब लोग दवाइयों के साइड इफेक्ट से बचना चाहते हैं, तब फिजियोथेरेपी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आई है। यह तरीका शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के साथ जीवनशैली को भी बेहतर बनाता है।
अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख ज़रूरी
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. निकेता रिछारिया (एमपीटी, आर्थो – राजीव गांधी कॉलेज, भोपाल) का कहना है कि फिजियोथेरेपी हमेशा प्रशिक्षित और अनुभवी विशेषज्ञ की निगरानी में ही करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यह न केवल मरीज की तकलीफ को दूर करती है बल्कि दैनिक दिनचर्या को सुचारू बनाए रखने में भी मदद करती है।
बदली जीवनशैली से बढ़ रही परेशानिया
डॉ. रिछारिया के अनुसार, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित आहार के कारण हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होती जा रही हैं। इससे कमर दर्द, घुटनों का दर्द और अन्य शारीरिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि सही समय पर फिजियोथेरेपी लेने से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को लाभ मिल सकता है। यह तकनीक कई जटिल बीमारियों से राहत दिलाने में भी प्रभावी है
स्वास्थ्य के लिए वरदान
फिजियोथेरेपी न केवल उपचार का साधन है बल्कि स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की भी कुंजी है। यह पद्धति आज की बदलती जीवनशैली में लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है।









