
रिपोर्टर – संतोष कुमार धनगर
ग्रामीणों ने रानी दुर्गावती के शौर्य, साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण को किया याद
खातेगांव। ग्राम पंचायत निवारदी में वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ महारानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इसके बाद सरपंच श्री सुभागसिंह इवने ने उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए रानी दुर्गावती के जीवन और उनके प्रेरणादायी योगदान पर प्रकाश डाला।
सरपंच श्री इवने ने कहा कि रानी दुर्गावती का जन्म चंदेल राजवंश के राजा कीरत सिंह चंदेल के यहां हुआ था। दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। बचपन से ही उन्हें घुड़सवारी, तीरंदाजी और युद्धकला का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिससे उनके व्यक्तित्व में साहस और नेतृत्व के गुण विकसित हुए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1542 में रानी दुर्गावती का विवाह गोंडवाना के राजा संग्राम शाह के पुत्र राजा दलपत शाह से हुआ था। वर्ष 1550 में राजा दलपत शाह के निधन के बाद रानी दुर्गावती ने अपने अल्पवयस्क पुत्र वीर नारायण के संरक्षक के रूप में शासन की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने 52 गढ़ों वाले विशाल राज्य का कुशल संचालन करते हुए प्रजा के कल्याण और राज्य की समृद्धि के लिए कार्य किया।
रानी दुर्गावती ने अपने साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण से इतिहास में विशेष स्थान बनाया। उनका जीवन आज भी समाज के लिए साहस, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में ग्रामवासी सतीश धुर्वे, रामानंद उईके, अशोक परते, भीमसिंह मस्कोले, रामभरोस परते, अर्जुन ककोडिया, महेंद्र सरियाम, मनोज ऐक्के, छगनलाल परते, बिन्तोश पटेल, धर्म सिंह कुमरे, संजय परते सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।









