
रिपोर्टर – जगजीत जन्डू
घड़साना। घड़साना मंडी में खेत बचाओ, किसान बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पिछले 30 दिनों से किसान आंदोलन जारी है। सिंचाई पानी सहित विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन के समर्थन में अब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल कल घड़साना पहुंचेंगे। उनकी उपस्थिति में धान मंडी में किसान महासभा आयोजित की जाएगी। महासभा को लेकर किसान संगठनों और स्थानीय लोगों में उत्साह देखा जा रहा है।
किसानों की तीन प्रमुख मांगें आंदोलन के दौरान मुख्य रूप से तीन मांगें उठाई जा रही हैं। इनमें किसानों को आठ बारी सिंचाई पानी उपलब्ध कराना, सिंचाई के पानी में 58 प्रतिशत रिजर्वेशन सुनिश्चित करना और मूंग की फसल के खराबे का उचित मुआवजा देना शामिल है। किसानों का मानना है कि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने से क्षेत्र के कृषि कार्यों को राहत मिलेगी।
महासभा में अधिकाधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए खेत बचाओ, किसान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा खाजूवाला, रावला, 365 हेड मंडी क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों से घड़साना पहुंचने की अपील की जा रही है। समिति किसानों को एकजुट कर उनकी मांगों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में जुटी है।
व्यापार मंडलों ने किया किसान आंदोलन का समर्थन किसान आंदोलन को विभिन्न मंडियों के व्यापारिक संगठनों का भी समर्थन मिला है। व्यापार मंडलों और संयुक्त व्यापार मंडल ने आंदोलन के समर्थन में कल बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है। घड़साना के अलावा रावला, 365 हेड, खाजूवाला और खानूवाली सहित अन्य मंडियों में भी बाजार बंद रखने की बात कही गई है।
व्यापारियों के समर्थन से किसान आंदोलन को व्यापक सहयोग मिला है। इससे महासभा में किसानों के साथ व्यापारिक संगठनों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
महासभा पर रहेगी क्षेत्रवासियों की नजर हनुमान बेनीवाल की प्रस्तावित महासभा किसान आंदोलन के साथ-साथ क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले 30 दिनों से जारी आंदोलन, व्यापारिक संगठनों के समर्थन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों से की जा रही अपील के बीच महासभा में होने वाली भागीदारी पर सभी की नजर रहेगी।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की सक्रियता से किसानों के मुद्दों को व्यापक मंच मिलने की संभावना है। महासभा के दौरान किसानों की प्रमुख मांगों को किस तरह उठाया जाता है और उनके समाधान को लेकर क्या पहल सामने आती है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
अब देखना होगा कि महासभा में किसानों की मांगों को लेकर क्या सहमति बनती है और सिंचाई पानी एवं फसल मुआवजे जैसे मुद्दों पर आगे की दिशा क्या तय होती है।









