
रिपोर्ट -जसप्रीत सिंह
राजस्थान, कोटा..मुख्य आयुक्त वाणिज्यिक राज्य कर विभाग श्री कुमार पाल गौतम द्वारा विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देशित किया गया था की राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की कर देयता का विश्लेषण कर यह सुनिश्चित करें कि इनके द्वारा अपनी टैक्स लायबिलिटी की उचित और सही रूप में अदायगी की जाए, जिससे राज्य को मिलने वाला राजस्व पूर्ण रूप से सुनिश्चित हो सके। मुख्य आयुक्त के दिशा-निर्देशों की पालना में राज्य की प्रवर्तन शाखा के अधिकारियों ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के कर अदायगी के पैटर्न का गहन विश्लेषण किया। इसी के अंतर्गत राज्य के एक प्रमुख सेक्टर कोचिंग/ ट्रेनिंग सेक्टर के विश्लेषण पर पाया कि इन संस्थानों द्वारा प्रदान की जा रही विभिन्न सेवाओं पर कर दायित्व का सही रूप से निर्वहन नहीं किया जा रहा है। इन संस्थानों के द्वारा आपूर्ति का स्थान (प्लेस ऑफ सप्लाई) राजस्थान होने के बावजूद अन्य राज्यों में दर्शाया जा रहा था जिसके कारण राज्य को मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा था। जबकि इनके द्वारा इन सेवाओं पर एसजीएसटी और सीजीएसटी का भुगतान किया जाने का उत्तरदायित्व था । इन संस्थानों के द्वारा गलत प्लेस ऑफ सप्लाई घोषित किए जाने से राज्य को मिलने वाले राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा था।राज्य के मुख्य आयुक्त के निर्देश पर 28 अगस्त को वाणिज्यिक राज्य कर विभाग की प्रवर्तन शाखा ने कोटा स्थित चार कोचिंग संस्थानों पर इन तथ्यों के आधार पर कार्यवाही की। कार्यवाही में पाया गया कि गलत रूप से प्लेस ऑफ सप्लाई की घोषणा कर इन संस्थानों ने लगभग 93 करोड़ की सीजीएसटी और एसजीएसटी का दायित्व बनने के बावजूद कर नहीं चुकाया गया है। विभाग द्वारा अब इस राशि को वसूल करने के लिए नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। इसके अलावा राज्य की अन्य कोचिंग/प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा उचित कर अदायगी न करने पर नियमानुसार कार्यवाही द्वारा कर वसूली सुनिश्चित किए जाने का निर्णय लिया गया है।
विभाग की इस कार्यवाही से सही प्लेस ऑफ सप्लाई की घोषणा और उचित कर अदायगी सुनिश्चित होने से हर माह लगभग 10 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।मुख्य आयुक्त ने बताया कि अन्य सेक्टर का भी गहन विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे कर रिसाव रोकने और कम व उचित रूप से कर अदा नहीं करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।









