
रिपोर्ट आर एन पाण्डेय
सिंगरौली/विंध्यनगर।
ग्राम ढोटी में प्रशासनिक बुलडोज़र कार्रवाई ने एक परिवार को बेघर कर दिया। रात में ही चार-चार नोटिस थमाए गए और सुबह होते ही भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकान जमींदोज कर दिया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से परिवार सड़क पर आ गया, मासूम बच्चे खुले आसमान तले रहने को मजबूर हो गए।
पीड़िता दुर्गावती का आरोप है कि उसके बीमार पति को बहला-फुसलाकर कथित वीरेंद्र कुमार उपाध्याय के पक्ष में फर्जी रजिस्ट्री करा दी गई। परिवार को इसकी भनक तक नहीं थी। जिसको उन्होंने अपना सहारा समझा, वही अब उनकी बर्बादी का कारण बन गया।
साहगों का दबदबा – पुलिस का पहरा
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने साहगों के दबाव में काम किया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था, जिससे कोई विरोध न कर सके।
ग्रामीणों ने कहा – “यह साफ है कि भू-माफियाओं और साहगों का बोलबाला है, प्रशासन उनके इशारे पर काम कर रहा है।”
हाईकोर्ट ने पहले ही दिया था बड़ा आदेश
याद दिला दें कि जमीन विवाद को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में पहले ही सुनवाई हो चुकी है।
माननीय न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल ने 25 सितम्बर 2018 को पारित आदेश (प्रकरण क्रमांक एम.पी. नं. 938/2018, वीरेंद्र कुमार उपाध्याय बनाम मस्त. दुर्गावती एवं अन्य) में साफ कहा था कि राजस्व मंडल का आदेश गलत था और नामांतरण की प्रक्रिया को डिक्री के निष्पादन से जोड़ना कानूनन गलत है। अदालत ने राजस्व मंडल का आदेश निरस्त करते हुए याचिका स्वीकार की थी।
इसके बावजूद प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी कर बुलडोज़र चलाया
जनता में आक्रोश, सरकार पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने एक पक्ष को संरक्षण दिया और निर्दोष परिवार को सड़क पर ला दिया।
“हमारे सामने कानून, अदालत सब बेकार हो गए। प्रशासन सिर्फ ताकतवरों की सुनता है।” ग्रामीणों का कहना।
लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। सवाल उठ रहे हैं कि जब मामला अदालत में स्पष्ट हो चुका था, तो प्रशासन ने इतनी जल्दबाजी और जबरन कार्रवाई क्यों की









