
रिपोर्टर – मानसिंह खत्री
हरदा जिले की हंडिया तहसील के ग्राम नयापुरा में संचालित कुछ निजी क्लिनिकों की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में संचालित क्लिनिकों की जांच कर चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, पंजीयन और मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि उपचार निर्धारित नियमों और आवश्यक चिकित्सा मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।
डॉक्टरों की डिग्री और पंजीयन की हो जांच ग्रामीणों ने नयापुरा सहित हंडिया तहसील के अन्य गांवों में संचालित निजी क्लिनिकों के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। इसके तहत संबंधित चिकित्सकों की डिग्री, चिकित्सा पद्धति के अनुसार उपचार करने की पात्रता, क्लिनिकों का वैध पंजीयन और मरीजों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध सुविधाओं की पड़ताल किए जाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि संबंधित विभाग द्वारा इन क्लिनिकों का नियमित निरीक्षण किया जाता है या नहीं। उन्होंने प्रशासन से जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में रहने वाले लोग उपचार के लिए स्थानीय क्लिनिकों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में चिकित्सा संबंधी नियमों, आवश्यक जांच प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से आग्रह किया है कि संबंधित क्षेत्रों में मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया जाए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों को सुरक्षित एवं योग्य चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
प्रशासन से ग्रामीणों का सवाल—जांच कब होगी?
ग्रामीणों ने मांग की है कि नयापुरा और हंडिया तहसील के अन्य क्षेत्रों में संचालित निजी क्लिनिकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच के दौरान पंजीयन, चिकित्सकीय योग्यता अथवा निर्धारित नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों की इस मांग पर कब संज्ञान लेता है और जांच के लिए क्या कदम उठाता है।
संबंधित क्लिनिकों के संबंध में आधिकारिक जांच और कार्रवाई की पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।









