
रिपोर्टर – टेलू राम कश्यप
गरियाबंद। गुजराती समाज द्वारा आयोजित गरबा महोत्सव शहर की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बन चुका है। लगभग 59 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आस्था, लोकसंस्कृति और पारिवारिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिलता है। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी इस उत्सव को विशेष बनाती है।
इस वर्ष गरबा महोत्सव का आयोजन बस स्टैंड स्थित राजूबिड़ी प्रांगण के स्थान पर मजरकट्टा स्थित निषाद समाज परिसर में किया जा रहा है। नए आयोजन स्थल पर भी प्रतिभागियों का उत्साह और सामूहिक सहभागिता आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। गरबा की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागी उत्सव के रंगों को जीवंत कर रहे हैं। पारिवारिक सहभागिता से सजी सांस्कृतिक परंपरा गरियाबंद के गरबा महोत्सव की विशेषता इसका पारिवारिक और सामुदायिक वातावरण है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागी जब संगीत की मधुर धुनों पर सामूहिक गरबा करते हैं, तो पूरा परिसर उत्साह और उल्लास से भर उठता है। विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में समाज की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। यह महोत्सव परिवारों को एक-दूसरे से जुड़ने, परिचितों से मिलने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने का अवसर प्रदान करता है। बच्चों और युवाओं के साथ वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता से गरबा की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है। छह दशकों से अधिक की सांस्कृतिक यात्रा लगभग छह दशकों से जारी यह आयोजन गरियाबंद के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। समय के साथ आयोजन स्थल और स्वरूप में बदलाव होने के बावजूद गरबा के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह निरंतर बना हुआ है।
गुजराती समाज की इस पहल से पारंपरिक गरबा नृत्य को स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है। साथ ही, शहरवासियों को एक साझा सांस्कृतिक मंच पर एकत्र होने और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। इस प्रकार गरबा महोत्सव समाज की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। आशीष ठक्कर और प्रकाश सरवैया के अनुभव गरबा महोत्सव की ऐतिहासिक यात्रा, इसकी शुरुआत और पुराने आयोजन स्थलों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाने में उपयोगी हैं। उनके अनुभवों के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलता है कि गुजराती समाज ने किस प्रकार इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया और नई पीढ़ी को इससे जोड़े रखा।
गरियाबंद का गरबा महोत्सव सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक एकजुटता का सुंदर उदाहरण है। लगभग 59 वर्षों से जारी यह परंपरा आज भी लोगों को एक मंच पर जोड़ रही है। मजरकट्टा स्थित निषाद समाज परिसर में आयोजित हो रहा यह महोत्सव गरियाबंद की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।









