
रिपोर्टर रमाशंकर ओमरे
ई-टोकन व्यवस्था से परेशान किसानों का अमानगंज में प्रदर्शन, चक्काजाम का प्रयास; तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
अमानगंज (पन्ना)। खेतों में फसल तैयार करने की चिंता और दूसरी ओर खाद के लिए टोकन की जद्दोजहद। किसानों का आरोप है कि खाद उपलब्ध होने के बावजूद ई-टोकन व्यवस्था और सर्वर की समस्या ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को समाजसेवी तिलक राज पटेल के नेतृत्व में किसानों ने अमानगंज में प्रदर्शन किया। आक्रोशित किसानों ने अमानगंज-किशनगढ़ मुख्य मार्ग पर चक्काजाम करने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर अमानगंज पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाइश दी।
प्रदर्शन के दौरान तिलक राज पटेल ने सरकार और प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसानों को खाद उपलब्ध कराना है, तो ई-टोकन व्यवस्था को सरल बनाया जाए। उन्होंने मांग की कि टोकन बुकिंग की सुविधा कम से कम 12 घंटे तक उपलब्ध हो, ताकि किसान समय पर खाद प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि किसान खेतों में काम करने के बजाय मोबाइल पर टोकन बुक करने और सर्वर चालू होने का इंतजार करने को मजबूर हैं। यदि सरकार किसानों को खाद नहीं दे पा रही है, तो उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया जाए, ताकि वे रोज-रोज की परेशानी से बच सकें। किसान राम प्रकाश पटेल ने भी व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसान खेती करे, ट्रैक्टर चलाए या टोकन के लिए चक्कर काटता रहे? खाद की व्यवस्था में ही किसानों का समय बर्बाद हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि खाद वितरण की प्रक्रिया सुचारु बनाई जाए, जिससे किसानों को समय पर खाद मिल सके।
22 दिनों से परेशानी, अब दो दिन का अल्टीमेटम किसानों का आरोप है कि पिछले 22 दिनों से ई-टोकन बुकिंग में सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने टोकन बुकिंग का समय एक घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने, जरूरत पड़ने पर बिना टोकन खाद वितरण कराने, स्टॉक की ऑनलाइन जानकारी दर्ज नहीं करने वाले संचालकों पर कार्रवाई करने और खाद की कालाबाजारी रोकने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कलेक्टर पन्ना के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। साथ ही प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में खाद की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है। फिलहाल किसानों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि खाद की समस्या का समाधान नहीं होने पर वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।









