
रिपोर्टर – विशाल बागमार
करही। नगर में वर्षावास के लिए विराजित पूज्य गुरुदेव प्रदीप मुनिजी महाराज साहब एवं पीयूष मुनिजी महाराज साहब की सद्प्रेरणा से दो बालिकाओं ने दीर्घ तपस्या पूर्ण कर धार्मिक साधना का संदेश दिया। वंशी डाकोलिया ने 30 उपवास तथा सिद्धि छाजेड़ ने 31 उपवास की मासक्षमण तपस्या पूर्ण की। दोनों बहनों ने यह तपस्या केवल गर्म जल के आधार पर पूर्ण की।
अवसर पर पूज्य गुरुदेव प्रदीप मुनिजी महाराज साहब ने तप की महिमा बताते हुए कहा कि तपस्या से पूर्व के अशुभ कर्मों का क्षय होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। आगम एवं शास्त्रों में भी अनेक भव्य आत्माओं द्वारा दीर्घ तपस्या के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन बड़े पुण्य के उदय से प्राप्त हुआ है, इसलिए इसे सार्थक बनाने के लिए जीवन में अहिंसा, संयम और तप को अपनाना चाहिए।
नगर में तपस्या का बना वातावरण
पूज्य गुरुदेव की सद्प्रेरणा से करही नगर में लगातार विभिन्न तपस्याएं संपन्न हो रही हैं। इससे पूर्व निर्मला नाहर ने 36 उपवास तथा नितिन नाहर ने 30 उपवास की दीर्घ तपस्या पूर्ण की। इसके अलावा करीब 50 अठाई तप, तीन सिद्धि तप, 12 उपवास, 11 उपवास सहित अनेक तपस्याएं भी पूर्ण हो चुकी हैं।
विभिन्न नगरों से पहुंचे श्रद्धालु
वंशी डाकोलिया के 30 उपवास पूर्ण होने के उपलक्ष्य में डेढ़ पोरसी के पालने का आयोजन किया गया। इसमें इंदौर, पारा, मेघनगर, रतलाम, आष्टा, जावरा, तराना सहित निमाड़ क्षेत्र के विभिन्न नगरों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे और तपस्वियों की अनुमोदना की।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का वातावरण रहा। तपस्वियों की साधना को धर्मप्रेमियों ने प्रेरणादायी बताते हुए उनके तप की अनुमोदना की।









