
रिर्पोटर मुहम्मद इसरार मुरैना
20 अक्टूबर तक सफाई पूरी करने के थे निर्देश, 1 नवंबर से मिलना है सिंचाई का पानी; जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही
मुरैना। रबी फसल की सिंचाई के लिए किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने जल संसाधन विभाग को 20 अक्टूबर तक जिले की सभी नहरों की साफ-सफाई पूरी कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन नहरों का निरीक्षण करने पर जगह-जगह गंदगी और कचरे का अंबार दिखाई दे रहा है। ऐसे में नहरों की सफाई को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि 6 अक्टूबर को आयोजित जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में कलेक्टर ने सभी सब इंजीनियरों को प्रतिदिन तीन ग्रामों की नहरों की सफाई सुनिश्चित करने और सफाई कार्य के फोटोग्राफ साझा करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सफाई में लापरवाही मिलने या शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित सब इंजीनियर के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद यदि नहरों में गंदगी बनी हुई है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सफाई के निर्देशों का कितना पालन हुआ? क्या संबंधित अधिकारी निर्धारित समय-सीमा में सफाई कार्य पूरा करा पाए हैं?
वहीं, सूत्रों के अनुसार हर साल नहरों की सफाई के नाम पर टेंडर जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद सफाई की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठते रहे हैं। सफाई कार्य और सरकारी राशि के उपयोग में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
1 नवंबर से शुरू होना है सिंचाई के लिए पानी
जल संसाधन विभाग की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार रबी सीजन में 1 नवंबर 2026 से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाना है। चंबल नहर प्रणाली के अंतर्गत चार चरणों में नहरों का संचालन प्रस्तावित है। ऐसे में नहरों की समय पर सफाई और जल प्रवाह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि किसानों को पलेवा सहित निर्धारित सिंचाई के लिए पानी मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जल संसाधन विभाग नहरों की सफाई पूरी कर किसानों को समय पर पानी उपलब्ध करा पाएगा? क्या कलेक्टर के निर्देशों के पालन की वास्तविक स्थिति की समीक्षा होगी?









