
रिपोर्टर जय प्रकाश
सिंगरौली।महिलाओं के दाम्पत्य जीवन में पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाने वाला संकष्टी गणेश चतुर्थी करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ किया गया। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा और शाम काल चंद्र दर्शन के उपरांत व्रत पारण किया। इस व्रत में भगवान शिव शंकर, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्र देवता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। करवाचौथ की कथा सुनने से विवाहित महिलाओं का सुहाग की उम्र लम्बी होती है। उनके घर में सुख, शान्ति, समृद्धि और सन्तान सुख मिलता है। महाभारत में भी करवाचौथ के महात्म्य पर एक कथा का उल्लेख मिलता है। भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को करवाचौथ की यह कथा सुनाते हुए कहा था कि पूर्ण श्रद्धा और विधिपूर्वक इस व्रत को करने से समस्त दुख दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख, सौभाग्य तथा धन, धान्य की प्राप्ति होने लगती है। श्री कृष्ण भगवान की आज्ञा मानकर द्रौपदी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा था। इस व्रत के प्रभाव से ही अर्जुन सहित पांचों पांडवों ने महाभारत के युद्ध में कौरवों की सेना को पराजित कर विजय हासिल की।
घर के अंदर निभाई गयी परंपरा करवा चौथ के पूजन उपरांत चांद देखने के लिए आम तौर पर महिलाएं छत पर जाती थीं। जहां से चांद को अर्घ्य दिया जाता है। जिसके बाद छलनी से चांद को निहारना, पति से भोजन ग्रहण करने और फिर उनके हाथों जल पीकर व्रत पारण किया जाता है। लेकिन इस बार लगातार बारिश के कारण सबकुछ घर के अंदर ही सभी प्रकार के अनुष्ठान किए गए।
नहीं हुए चंद्रदेव के दर्शन करवा चौथ का व्रत चंद्र दर्शन उपरांत पूर्ण माना जाता है। जिले में गुरुवार की शाम 8:01 बजे चंद्रोदय होना था, लेकिन मौसम व चक्रवात अर्शब के असर के कारण लगातार बारिश होती रही, जिससे चांद नहीं दिखाई पड़ा। समय पूर्ण होने के उपरांत आचार्यों ने बताया कि लाल कपड़े अथवा थाली में चावल से चांद बनाकर दर्शन करके व्रत पारण किया जा सकता है। इसके अलावा भगवान शंकर जी के मस्तक पर विराजित चंद्रमा के दर्शन, आत्मिक रूप से स्मरण करके भी व्रत का पारण किया गया। करवा चौथ के पूजन उपरांत चांद देखने के लिए आमतौर पर महिला छत पर जाती थी। जहां से चांद को अर्ध्य दिया जाता है ।जिसके बाद छलनी से चांद को निहारना,पति से मिष्ठान ग्रहण करने और फिर उनके हाथों जल पीकर व्रत पारायण किया जाता है। लेकिन इस बार लगातार बारिश के कारण सब कुछ घर के अंदर ही सभी प्रकार के अनुष्ठान किए गए।









