
- उत्तर प्रदेश की राजनीति में छात्र आंदोलनों का इतिहास हमेशा से गहरा रहा है। चाहे वह विश्वविद्यालयों की फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन हो या शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाली आवाज़ें—छात्र संगठनों ने लोकतंत्र को ज़िंदा रखा है। ऐसे में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के शांतिपूर्ण आंदोलन को “गुंडई” कह देना न केवल एक गैर-जिम्मेदाराना बयान है बल्कि लोकतंत्र की उस नींव को चोट पहुँचाना है, जो असहमति और विरोध के अधिकार पर टिकी है।
विधायक नंद किशोर गुर्जर ने सही कहा कि छात्रों को गुंडा कहना युवाओं का अपमान है। यह वही युवा हैं जो कल देश की बागडोर संभालेंगे। इनकी आवाज़ को दबाने या इसे “गुंडई” कहकर खारिज करने का मतलब है आने वाले कल की दिशा को नज़रअंदाज़ करना।
दूसरी ओर, श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी पर लगे आरोप कम गंभीर नहीं हैं। यदि सचमुच बिना बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता के LLB कोर्स चलाया गया, तो यह छात्रों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ है। यही वजह है कि ABVP का आंदोलन केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि शैक्षणिक न्याय की लड़ाई भी है।
पुलिस का लाठीचार्ज, छात्रों की गिरफ्तारी और फिर राजभर का बयान—यह पूरा घटनाक्रम हमें याद दिलाता है कि सत्ता में बैठे लोग भाषा और कार्रवाई दोनों में संयम खो रहे हैं। लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए, न कि उसका दमन।
यह मामला सिर्फ ABVP बनाम राजभर नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि क्या हमारी राजनीति अब युवाओं की आवाज़ सुनने को तैयार है या उसे “गुंडई” कहकर दरकिनार कर देगी। नेताओं को याद रखना चाहिए कि छात्रों को अपमानित करने से वे न केवल अपनी छवि खराब करते हैं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को भी ठेस पहुँचाते हैं।
अब देखना यह है कि ओपी राजभर माफी माँगकर स्थिति को सुधारते हैं या फिर यह विवाद और गहराई तक जाएगा। लेकिन एक बात तय है—छात्रों की आवाज़ को खामोश करना किसी भी लोकतांत्रिक समाज में संभव नहीं है।
*तिथि-वार घटना क्रम*
3 सितंबर 2025 को बुधवार के दिन उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने SRMU, बाराबंकी में अवैध लॉ कोर्स और लाठीचार्ज के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे ABVP कार्यकर्ताओं को कथित रूप से “गुंडा” कहकर संबोधित किया, इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी। उसी रात 3 सितंबर को ABVP कार्यकर्ता राजभर के लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचे, वहां जमकर नारेबाजी हुई, पुतला दहन किया गया, गेट पर चढ़ने और पत्थरबाजी तक की नौबत आई, हालांकि पुलिस ने हालात नियंत्रित कर लिए। 4 सितंबर को ABVP के आदर्श तिवारी ने राजभर को कानूनी नोटिस भेजते हुए 5 दिन में सार्वजनिक माफी मांगने और 7 दिन में लिखित आश्वासन देने की चेतावनी दी, अन्यथा मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की बात कही। इसी दिन ABVP ने कानपुर के Parade Crossing में पुतला दहन किया और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा, गोरखपुर में भी ABVP ने मार्च निकाला और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जिसमें राजभर के बयान को “गैर-जिम्मेदार, उत्तेजक और संवेदनहीन” बताया गया। वहीं SBSP के अरविंद राजभर ने सफाई देते हुए कहा कि बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और इसे विरोधियों की साजिश बताया। 5 सितंबर को उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात कर उन्हें शांत रहने की सलाह दी और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बनेगी, उधर ABVP ने पूरे प्रदेश में मशाल जुलूस निकाला और 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए साफ कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई, विश्वविद्यालय जांच, छात्रों के हक में न्याय और अवैध फीस की वसूली पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा। 6 सितंबर 2025 को ABVP ने शासन, पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी जारी की, लेकिन अब तक ओपी राजभर की ओर से कोई सार्वजनिक माफी या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।









