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पंचायतों में सरकारी पैसों का दुरुपयोग: जनता के हक़ पर डाका

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Bureau Report

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव ग्राम पंचायतों पर टिकी है। संविधान की 73वीं संशोधन से पंचायतों को मज़बूत किया गया ताकि गाँव-गाँव तक विकास पहुँचे। सरकार हर साल अरबों रुपये पंचायतों को भेजती है – सड़क, नाली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और रोज़गार योजनाओं पर खर्च करने के लिए।

लेकिन हकीकत यह है कि यह पैसा कई बार जनता की भलाई पर खर्च होने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। प्रधान, सचिव, ठेकेदार और अधिकारी की मिलीभगत से गाँव का विकास ठप हो जाता है और पैसा निजी जेबों में चला जाता है।

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कैसे होता है पैसे का दुरुपयोग?

1. फर्जी बिल और भुगतान – ऐसे सामानों के बिल दिखाए जाते हैं जो खरीदे ही नहीं गए।

2. अधूरे काम को पूरा दिखाना – आधी नाली या सड़क बनाकर पूरी दिखा देना।

3. फर्जी लाभार्थी – योजनाओं में ऐसे नाम डालना जिनसे असली में कोई लाभ नहीं हुआ।

4. सामान में ओवररेटिंग – बाजार से सस्ता मिलने वाला सामान महँगे दाम में दिखाना।

5. दोहराए गए बिल – एक ही काम का बिल अलग-अलग जगह से लगाकर बार-बार भुगतान लेना।

6. नकली मजदूरी रजिस्टर – मजदूरों के नाम दिखाकर पैसा निकाल लेना जबकि असल में काम ही न हुआ हो।

7. बिचौलियों का खेल – पंचायत का काम करने वाले ठेकेदार अधिकारियों से मिलकर धन का हिस्सा बाँट लेते हैं।

जनता पर सीधा असर

अधूरी सड़कें और टूटी-फूटी गलियाँ।

पानी, नाली, बिजली जैसी सुविधाएँ अधूरी रह जाना।

स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हालत में।

ग्रामीण रोजगार योजनाओं का लाभ न मिलना।

गरीबों और किसानों तक सब्सिडी न पहुँचना।

इसका सबसे बड़ा नुकसान आम ग्रामीण जनता को उठाना पड़ता है, जो उसी पैसे की हक़दार होती है।

रोकथाम और समाधान

RTI (सूचना का अधिकार) – जनता सीधे पूछ सकती है कि गाँव में कितनी राशि आई और कहाँ खर्च हुई।

सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) – हर योजना का सार्वजनिक मूल्यांकन ग्रामसभा में होना चाहिए।

e-Gram Swaraj पोर्टल और ऐप – यहाँ पंचायत का पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन उपलब्ध है।

ग्रामसभा की ताक़त – संविधाननुसार हर खर्च ग्रामसभा के सामने पेश होना चाहिए।

मीडिया और जनसंगठन की भूमिका – भ्रष्टाचार उजागर करने में पत्रकारिता और सामाजिक संगठनों की भूमिका अहम है।

कड़ी कार्रवाई – दोषियों पर FIR, विभागीय जांच और जेल तक की सज़ा सुनिश्चित हो।

विस्तृत प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1: पंचायत में भ्रष्टाचार का सबसे आम तरीका क्या है?

👉 सबसे ज़्यादा फर्जी बिल और अधूरे काम को पूरा दिखाने का खेल होता है। उदाहरण: आधी नाली बनाने के बाद पूरा दिखाकर बिल पास कराना।

प्रश्न 2: क्या जनता सीधे पंचायत से हिसाब मांग सकती है?

👉 हाँ, कानूनन ग्रामसभा में जनता को पूरा अधिकार है कि वह रसीदें, भुगतान और काम की प्रगति देख सके।

प्रश्न 3: अगर प्रधान या सचिव हिसाब न दें तो क्या करें?

👉 आप RTI दाखिल कर सकते हैं। साथ ही जिला पंचायत CEO या विकासखंड अधिकारी (BDO) को शिकायत कर सकते हैं।

प्रश्न 4: RTI से क्या जानकारी मिल सकती है?

👉 कितनी राशि आई, किस काम पर खर्च हुई, कब भुगतान किया गया, किस ठेकेदार या लाभार्थी को पैसा मिला – ये सब जानकारी RTI से मिल सकती है।

प्रश्न 5: क्या पंचायत का पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन उपलब्ध है?

👉 जी हाँ। e-Gram Swaraj पोर्टल और ऐप पर पंचायत को मिले धन और कामों का विवरण मिल सकता है।

प्रश्न 6: अगर फर्जी मजदूरी रजिस्टर बने तो मजदूर कैसे आवाज उठाएँ?

👉 मजदूरों के नाम पर भुगतान होने पर वे शिकायत कर सकते हैं। ग्राम रोजगार सहायक और पंचायत सचिव पर FIR तक दर्ज हो सकती है।

प्रश्न 7: पंचायत फंड का सामाजिक ऑडिट कैसे होता है?

👉 ग्रामसभा की बैठक में विकास कार्यों का ब्योरा जनता के सामने पढ़ा जाता है। वहाँ हर ग्रामीण सवाल पूछ सकता है और जवाब पाना अनिवार्य होता है।

प्रश्न 8: अगर मीडिया में खबर आए कि पंचायत में घोटाला हुआ है, तो आगे क्या होगा?

👉 खबर के बाद प्रशासन जांच बैठा सकता है। ऑडिट टीम भेजी जाती है, और दोषियों पर रिकवरी व कानूनी कार्रवाई होती है।

प्रश्न 9: दोषियों को क्या सज़ा हो सकती है?

👉 – सरकारी पद से हटाना

– राशि की रिकवरी

– भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जेल

– सार्वजनिक पद पर दोबारा न बैठने की रोक

प्रश्न 10: जनता भ्रष्टाचार रोकने में कैसे मदद कर सकती है?

👉 जागरूक रहकर, नियमित ग्रामसभा में हिस्सा लेकर, RTI का उपयोग करके और मीडिया/NGO से जुड़कर। जनता की भागीदारी ही सबसे बड़ी गारंटी है कि पैसा सही दिशा में खर्च हो।

 

 

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