
रिपोर्ट डॉ. आनंद दीक्षित
बुरहानपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बुरहानपुर की ‘दीदी की राखी’ स्नेह, विश्वास और आत्मीय रिश्तों को मजबूत करने वाली 28 वर्षों पुरानी परंपरा के रूप में निरंतर आगे बढ़ रही है। विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) की ओर से प्रतिवर्ष बुरहानपुर और नेपानगर विधानसभा के बूथ स्तर से लेकर लोकसभा क्षेत्र, प्रदेश और देशभर में स्नेही बंधुजनों तक विशेष संदेश के साथ रक्षा सूत्र पहुंचाए जाते हैं।इस वर्ष भी 1 लाख 18 हजार से अधिक रक्षा सूत्र स्नेही बंधुजनों तक पहुंचाए गए। यह रक्षा सूत्र स्नेह, विश्वास, अपनत्व और पारिवारिक भावनाओं का प्रतीक बन चुका है। इसकी विशेषता यह है कि कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में नागरिकों, सहयोगियों और परिवारों के घर पहुंचकर स्वयं रक्षा सूत्र एवं शुभकामना संदेश प्रदान करते हैं। इससे पर्व के अवसर पर व्यक्तिगत संपर्क और आत्मीयता का भाव और मजबूत होता है। हर वर्ष नए परिवारों से जुड़ती स्नेह की डोर दीदी की राखी’ से जुड़े स्नेहीजनों के नाम और पते की सूची का प्रतिवर्ष नवीनीकरण किया जाता है। पुराने स्नेहीजनों का विवरण अपडेट करने के साथ नए परिवारों को भी इस आत्मीय परंपरा से जोड़ा जाता है। पिछले 28 वर्षों में यह परंपरा निरंतर विस्तारित हुई है और अनेक परिवारों के साथ इसके आत्मीय संबंध बने हैं।इस रिश्ते की आत्मीयता का अनुभव तब भी होता है, जब किसी कारणवश किसी भाई तक ‘दीदी की राखी’ समय पर नहीं पहुंच पाती। ऐसे अवसर पर भाई सीधे अर्चना चिटनिस से संपर्क कर अपनी भावनाएं साझा करते हैं। यह संवाद वर्षों से बने आत्मीय रिश्ते की सहज अभिव्यक्ति है। किसी स्नेही भाई के निधन के बाद भी उसके परिवार के साथ यह आत्मीय जुड़ाव कायम रखा जाता है। परिवार तक रक्षा सूत्र और शुभकामना संदेश पहुंचाकर रिश्ते की निरंतरता को बनाए रखा जाता है। राखी के साथ राष्ट्र संकल्प का संदेश इस वर्ष ‘दीदी की राखी’ के साथ भेजे गए विशेष संदेश में रक्षा सूत्र को राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जोड़ा गया है। संदेश में कहा गया—“संशय को निष्ठा, निष्ठा को विश्वास, विश्वास को संकल्पित मन दें। भटके लोगों को राह, राह को ध्येय और ध्येय तक बढ़ते कदम दें।” संदेश के माध्यम से आपसी विश्वास, प्रेम और सेवा भावना के साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया गया। प्रत्येक व्यक्ति अपने पुरुषार्थ, परिश्रम और सेवा भाव से राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे, इसी भावना को रक्षा सूत्र के साथ घर-घर पहुंचाया गया। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष की गौरवपूर्ण स्मृति इस वर्ष राखी के साथ भेजे गए कार्ड में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने की गौरवपूर्ण स्मृति को भी शामिल किया गया। कार्ड पर अंकित पंक्तियां— रक्षाबंधन पर स्नेह, वंदे मातरम्… आइये, आपसी विश्वास और प्रेम के साथ हम सब मिलकर बांधें सूत्र संकल्प का…”रक्षाबंधन के पारिवारिक स्नेह को राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना से जोड़ती हैं। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया गया। विक्रम संवत 2083 का हिंदू नववर्ष 19 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ हुआ, जिसका उल्लेख भी कार्ड में भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के संदर्भ में किया गया है। 28 वर्षों से चली आ रही ‘दीदी की राखी’ की यह परंपरा स्नेह, विश्वास और पारिवारिक आत्मीयता को मजबूत करने का माध्यम बनी हुई है। बुरहानपुर और नेपानगर के बूथ स्तर से शुरू होकर देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने वाला यह रक्षा सूत्र हर वर्ष अनेक परिवारों को एक भाव से जोड़ता है। रक्षा सूत्र की यह डोर संदेश देती है—रिश्तों में विश्वास हो, मन में संकल्प हो, कर्म में सेवा हो और हृदय में राष्ट्र सर्वोपरि हो।









