
रिपोर्ट – सुनील तिवारी
दमोह/हिण्डोरिया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों के अनुरूप प्राथमिक स्तर पर बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय ‘मिशन अंकुर’ (FLN – Foundational Literacy and Numeracy) के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। बीआरसीसी श्री ललित कुमार रैकवार के नेतृत्व में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर के रूप में शिक्षिका संगीता सिंह शिक्षकों को गतिविधि आधारित एवं आनंददायी शिक्षण की विभिन्न तकनीकों से परिचित करा रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान हिंदी, अंग्रेजी और गणित विषयों पर केंद्रित गतिविधियां कराई जा रही हैं।अंग्रेजी विषय का प्रशिक्षण दे रहीं शिक्षिका संगीता सिंह ने पारंपरिक शिक्षण विधियों के साथ रोचक एवं गतिविधि आधारित तकनीकों का प्रयोग करते हुए शिक्षकों को प्रभावी अध्यापन के तरीके बताए। उन्होंने राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई ‘जादू पिटारा’ सामग्री, फ्लोर गेम्स और टीएलएम (TLM) के माध्यम से शिक्षण गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
‘I Do, We Do, You Do’ और TPR पद्धति पर जोर प्रशिक्षण के दौरान स्कैफोल्डिंग तकनीक के तहत “मैं करूं, हम करें, आप करें” (I Do, We Do, You Do) पद्धति का जीवंत प्रदर्शन किया गया। संगीता सिंह ने बताया कि किसी भी गतिविधि को पहले शिक्षक स्वयं करके दिखाएं, इसके बाद सभी बच्चों के साथ मिलकर उसका अभ्यास कराएं और अंत में बच्चों को स्वयं गतिविधि करने का अवसर दें। उन्होंने भाषा शिक्षण में TPR (Total Physical Response) यानी ‘पूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया’ पद्धति के महत्व को भी समझाया। इस तकनीक में निर्देशों के साथ शारीरिक गतिविधियों का समन्वय किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान पहले स्वयं गतिविधि करके दिखाई गई, फिर शिक्षकों के साथ उसका अभ्यास कराया गया और अंत में शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से गतिविधि करने का अवसर दिया गया। TLM और खेल-खेल में पढ़ाई पर जोर प्रशिक्षण में विभिन्न प्रकार की शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM), गेम्स, पिक्चर कार्ड, लेटर कार्ड और स्टोरी बुक्स का उपयोग किया जा रहा है। इनके माध्यम से कैपिटल एवं स्मॉल लेटर्स की पहचान, शब्द निर्माण और शरीर के विभिन्न अंगों की पहचान जैसी गतिविधियों को रोचक तरीके से सिखाने के तरीके बताए जा रहे हैं। शिक्षिका संगीता सिंह ने कहा कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री का कक्षा में प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। ‘Joyful Learning’ के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक एवं मनोरंजक गतिविधियों से जोड़कर सीखने का अवसर देना जरूरी है, ताकि पढ़ाई उनके लिए आनंददायी अनुभव बने। बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर प्रशिक्षण में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। शिक्षकों को बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर ध्यान देने तथा प्रत्येक बच्चे को शैक्षणिक गतिविधियों में सहभागिता का अवसर देने के लिए प्रेरित किया गया। यदि कोई बच्चा कक्षा में शांत रहता है या गतिविधियों में कम सहभागिता करता है, तो शिक्षक उसकी आवश्यकताओं को समझकर अभिभावकों से संवाद स्थापित करें और उचित सहयोग प्रदान करें। साथ ही रचनात्मक अभिव्यक्ति, संवाद, पोषण, सहयोग, टीमवर्क और समस्या समाधान जैसी क्षमताओं के विकास के लिए बच्चों को निरंतर प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया। यह प्रशिक्षण मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा की बुनियादी नींव को मजबूत करना तथा बच्चों को गतिविधि आधारित और आनंददायी शिक्षण के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है।









