
संवाददाता राजपाल सिंह
देवास में शनिवार को एक दिवसीय बाढ़ आपदा राहत एवं बचाव कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य टास्क फोर्स, स्ट्राइक टीम, स्थानीय गोताखोरों और सिविल डिफेंस वालंटियर के बीच समन्वय स्थापित कर आपदा प्रबंधन की क्षमता को और अधिक सशक्त बनाना रहा। अपर कलेक्टर शोभाराम सोलंकी ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासन का कार्य नहीं है, बल्कि इसमें हर स्तर पर सहयोग और सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं लगातार आयोजित होती रहनी चाहिए ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सोलंकी ने जल संसाधन विभाग, पुलिस विभाग, नगर निगम, राजस्व, होमगार्ड, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों सहित सभी सहयोगी विभागों को कार्यशाला आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यशाला का शुभारंभ संभागीय सेनानी उज्जैन रोहतास पाठक और अधीक्षक भू-अभिलेख राजेश सरवटे ने किया। प्रथम सत्र में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के विस्तृत प्रावधानों, संस्थागत व्यवस्था और आपातकालीन परिचालन केंद्र की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। द्वितीय सत्र में एक्सीलेंस कॉलेज देवास के एनसीसी अधिकारी संजय गडवे ने प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं, विशेषकर बाढ़ आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों पर व्याख्यान दिया। तृतीय सत्र में जिला कमांडेंट डॉ. मधु राजेश तिवारी ने बाढ़ प्रबंधन से संबंधित पूर्व तैयारियों, राहत और बचाव कार्यों की महत्ता पर प्रतिभागियों को समझाया। चतुर्थ सत्र व्यावहारिक प्रशिक्षण पर केंद्रित रहा। इसमें एसडीआरएफ के प्लाटून कमांडर रोहन रैकवार और होमगार्ड प्लाटून कमांडर वीणा कौशल ने विपरीत परिस्थितियों में उपलब्ध संसाधनों से बचाव सामग्री तैयार करने के उपाय बताए। प्रतिभागियों को प्लास्टिक की खाली बोतलों से लाइफ जैकेट, ट्यूब से लाइफ बॉय और बांस से राफ्ट बनाने की तकनीक सिखाई गई। इसके साथ ही कंबल का उपयोग कर स्ट्रेचर, टू-हैंड शीट, थ्री-हैंड शीट और फॉर-हैंड शीट बनाकर घायलों को सुरक्षित अस्पताल तक ले जाने के तरीकों का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और पाठ्य सामग्री वितरित कर किया गया। आयोजन में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, वालंटियर और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।









