
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने हाल ही में हुए चुनाव में मिली हार के बाद अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। इस निर्णय ने देश की राजनीति में अस्थिरता और अनिश्चितता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा जापान की शासन प्रणाली और आगामी नीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
चुनावी परिणामों में विपक्ष को मिली बढ़त ने इशिबा की सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए थे। पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ा था, जिससे प्रधानमंत्री पर दबाव बना। चुनावी हार के बाद उन्होंने जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया।
इशिबा ने अपने इस्तीफे में कहा कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और देश के हित में एक नया नेतृत्व सामने आना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल में किए गए प्रयासों को लेकर संतोष व्यक्त किया और जनता से देश की स्थिरता बनाए रखने का आग्रह किया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जापान की आर्थिक नीतियाँ, विदेश नीति और सुरक्षा मुद्दे इस समय गंभीर बहस का विषय बने हुए हैं। प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद नए नेतृत्व की खोज तेज हो गई है। संसद और राजनीतिक दलों में नेताओं को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर ध्यान दिया जा रहा है। अमेरिका, यूरोपीय देशों और एशियाई पड़ोसियों ने जापान की स्थिरता पर चिंता जताई है और सहयोग बनाए रखने का भरोसा दिया है।
जापान की जनता में भी मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कुछ लोग नए नेतृत्व की उम्मीद कर रहे हैं तो कुछ इस बदलाव को राजनीतिक अस्थिरता का संकेत मान रहे हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि जापान की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।









