
डॉ. वरुण कपूर – साइबर सुरक्षा से समाज सुधार तक का अद्वितीय सफर
पुलिस सेवा अक्सर अपराधियों से संघर्ष और कानून-व्यवस्था तक सीमित मानी जाती है। लेकिन जब कोई अधिकारी अपनी वर्दी को समाज सुधार, शिक्षा और जागरूकता का प्रतीक बना दे, तब वह केवल पुलिस अधिकारी नहीं रह जाता, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत बन जाता है।
मध्यप्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. वरुण कपूर (1991 बैच) ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर साइबर अपराध रोकथाम, जनजागरूकता, प्रशिक्षण, साहित्य, फोटोग्राफी और अब जेल सुधार की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए।
आज वे डीजी (जेल), मध्यप्रदेश हैं और अपने विचारों व प्रयासों से यह सिद्ध कर रहे हैं कि जेल केवल दंड की जगह नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र हो सकती है।
शिक्षा से सेवा तक
डॉ. कपूर की शिक्षा यात्रा भी उनके व्यक्तित्व की तरह प्रेरणादायक रही। उन्होंने NIT त्रिची से मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ऑनर्स) की पढ़ाई की। इंजीनियर बनने के बाद वे आरामदायक जीवन चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन की। यह निर्णय केवल करियर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र सेवा का मार्ग था।
शुरुआती पुलिसिंग और नेतृत्व की पहचान
धार, सीहोर और रतलाम जैसे जिलों में बतौर एसपी डॉ. कपूर ने कानून-व्यवस्था को नई दिशा दी। उनकी पुलिसिंग शैली कठोर अनुशासन और मानवीय संवेदनशीलता का मिश्रण रही।
बतौर डीआईजी (उज्जैन, रतलाम और छतरपुर), उन्होंने न केवल अपराध नियंत्रण की नई रणनीतियाँ लागू कीं, बल्कि पुलिस-जनता संबंधों को मजबूत करने पर भी बल दिया।
इंदौर में आईजी रहते हुए उन्होंने अपराधियों के लिए कड़ी नीति अपनाई और साथ ही युवाओं को अपराध से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए।
*साइबर अपराध – नई चुनौती, नया समाधान*
समय के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदला। डॉ. कपूर ने सबसे पहले इस बदलाव को पहचाना और कहा—
“भविष्य का अपराध साइबर अपराध होगा, और इसका समाधान केवल तकनीक नहीं, बल्कि जागरूकता है।”
यही सोच उनके Black Ribbon Initiative की नींव बनी।
ब्लैक रिबन इनिशिएटिव – एक जनआंदोलन
इस पहल के जरिए उन्होंने करोड़ों भारतीयों तक साइबर अपराध से बचने का संदेश पहुँचाया।
हजारों कार्यशालाएँ
लाखों विद्यार्थी, प्रोफेशनल्स और आम नागरिक करोड़ों लोगों तक अप्रत्यक्ष पहुँच
वे लोगों को सरल भाषा में समझाते हैं—फ्रॉड कॉल्स से कैसे बचें, पासवर्ड कैसे रखें, सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करें, और बच्चों को ऑनलाइन खतरों से कैसे दूर रखें।
उनकी पहल को देशभर में सराहा गया और यह कहा जाने लगा कि—
“अगर भारत में साइबर जागरूकता की नींव रखी गई, तो उसमें सबसे बड़ा योगदान डॉ. वरुण कपूर का है।”
अंतरराष्ट्रीय पहचान*
एशिया के पहले पुलिस अधिकारी जिन्हें साइबर सुरक्षा में Honorary Doctorate मिला।
World Book of Records London में एक ही दिन में 1200 पुलिस अधिकारियों को साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण देने का रिकॉर्ड।
संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका और ब्रिटेन तक कई मंचों पर व्याख्यान।
वर्तमान भूमिका – डीजी जेल, मध्यप्रदेश
2025 में डॉ. कपूर को डीजी जेल की जिम्मेदारी दी गई। जेल प्रशासन को आमतौर पर कठोर और दंडात्मक माना जाता है, लेकिन डॉ. कपूर की सोच अलग है। वे कहते हैं—
“जेल केवल अपराधियों को कैद करने की जगह नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर है।”
उनकी पहलें—
शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम: कैदियों को पढ़ाई और रोजगारपरक प्रशिक्षण।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता: तनाव प्रबंधन, योग और परामर्श।
डिजिटल साक्षरता: ताकि रिहा होने के बाद कैदी तकनीकी रूप से सक्षम हो सकें।
पुनर्वास योजनाएँ: कैदियों को समाज से पुनः जोड़ने के लिए NGO और उद्योगों से साझेदारी।
बहुआयामी व्यक्तित्व
डॉ. कपूर केवल पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि लेखक और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर भी हैं। उनकी पुस्तक “COP WITH A CAMERA – Wilderness Diaries” बेहद लोकप्रिय रही। वे चार महाद्वीपों में नेशनल पार्कों में फोटोग्राफी कर चुके हैं।
सम्मान और पुरस्कार
राष्ट्रपति पुलिस पदक
Union Home Minister’s Medal for Excellence in Training
APJ अब्दुल कलाम नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड
World Book of Records London में कई बार दर्ज
करोड़ों लोगों के लिए……
आज डॉ. कपूर का नाम न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे भारत में सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है। साइबर सुरक्षा में उनकी भूमिका ने करोड़ों भारतीयों को सुरक्षित किया है। जेल प्रशासन में उनके प्रयास कैदियों के पुनर्वास की नई मिसाल बन रहे हैं।
डॉ. वरुण कपूर उस दुर्लभ श्रेणी के अधिकारी हैं, जो वर्दी को शक्ति नहीं, बल्कि सेवा मानते हैं। वे अपराधियों के लिए सख्त हैं, लेकिन समाज के लिए प्रेरक। साइबर अपराध रोकथाम में उनकी क्रांति और जेल सुधार की उनकी पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है। वे केवल एक आईपीएस अधिकारी नहीं, बल्कि एक आंदोलन हैं—एक सोच हैं, जो कहती है कि अपराध से लड़ाई केवल हथियार से नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और सुधार से जीती जाती है।









