
रिपोर्टर – कृष्ण चन्द्र भारती
पढ़ाई के दौरान आयोजित हुई प्रक्रिया, अनुमति और वैकल्पिक स्थल के चयन पर स्पष्टीकरण का इंतजार संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश। हैसर विकास खंड की ग्राम पंचायत जगदीशपुर में प्राथमिक विद्यालय में पठन-पाठन के दौरान सोशल ऑडिट कराए जाने का मामला सामने आया है। इस आयोजन को लेकर विद्यालय में पढ़ाई के समय के निर्धारण, अनुमति और आयोजन स्थल के चयन पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि जब ग्राम पंचायत में पंचायत भवन उपलब्ध है, तो सोशल ऑडिट के लिए विद्यालय परिसर का चयन किन परिस्थितियों में किया गया।
दोपहर करीब 12:30 बजे पहुंचे ऑडिटर प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोशल ऑडिट के लिए ऑडिटर अखिलेश शर्मा दोपहर करीब 12:30 बजे के बाद पहुंचे। उस समय विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य चल रहा था। ऐसे में आयोजन के समय और व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या विद्यालय में सोशल ऑडिट कराने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी। हालांकि, इस विशेष मामले में अनुमति से संबंधित स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
पंचायत भवन की व्यवस्था पर भी चर्चा ग्राम पंचायत में पंचायत भवन उपलब्ध होने के बावजूद सोशल ऑडिट के लिए प्राथमिक विद्यालय को चुने जाने के कारणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पंचायत भवन की साफ-सफाई, रखरखाव और उपयोग की व्यवस्था पर भी चर्चा हो रही है। इन व्यवस्थाओं से संबंधित जिम्मेदारियों को लेकर ग्राम पंचायत सचिव शैलजा मिश्रा का नाम सामने आया है।
डीडीओ ने कहा, विद्यालय में हो सकती है सोशल ऑडिट मामले में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) रुक्मणि वर्मा से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि विद्यालय में सोशल ऑडिट कराई जा सकती है। हालांकि, जगदीशपुर के इस विशेष मामले में अनुमति ली गई थी या नहीं, इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। वहीं, जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) अरुण कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत का पंचायत भवन चालू है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उचित रास्ते की व्यवस्था नहीं है। उनके अनुसार, पंचायत भवन तक केवल मोटरसाइकिल से पहुंचा जा सकता है।
आयोजन स्थल और शैक्षणिक व्यवस्था पर स्पष्टीकरण जरूरी मामले में पंचायत भवन तक पहुंचने की सुविधा, वैकल्पिक स्थल के चयन और विद्यालय में सोशल ऑडिट आयोजित करने की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना आवश्यक है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आयोजन के दौरान विद्यालय में नियमित पढ़ाई की व्यवस्था किस प्रकार संचालित की गई।
संबंधित अधिकारियों से इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मिलने से मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इससे सोशल ऑडिट की प्रक्रिया और विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।









