
रिपोर्टर सोनू नामदेव
मध्यप्रदेश में मध्यान्ह भोजन और साझा चूल्हा योजना से जुड़ी महिला स्व सहायता समूहों की संचालक बहनों और रसोइया बहनों ने अपने अधिकारों की लड़ाई तेज करने का ऐलान किया है। प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह रसोइया महासंघ मध्यप्रदेश ने प्रदेश सरकार को 9 नवंबर 2026 तक मांगों का निराकरण करने का अल्टीमेटम दिया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि तय समय सीमा तक ठोस निर्णय नहीं होने पर 10 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में हाईवे जाम आंदोलन किया जाएगा।
महासंघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने कहा कि वर्षों से बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का काम कर रहीं महिलाओं को समय पर भुगतान, पर्याप्त खाद्यान्न और रोजगार की सुरक्षा जैसे बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार को अब इन समस्याओं का स्थायी समाधान करना चाहिए।
चूल्हा बंद हड़ताल से भोपाल में महाआंदोलन तक पहुंचा संघर्ष महासंघ के नेतृत्व में महिला स्व सहायता समूहों और रसोइया बहनों ने अपनी मांगों को लेकर 15 सितंबर 2026 से प्रदेशव्यापी चूल्हा बंद हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद आंदोलन को व्यापक रूप देते हुए 10 अक्टूबर को भोपाल में महाआंदोलन किया गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में समूह संचालक महिलाएं और रसोइया बहनें शामिल हुईं।
महासंघ के अनुसार, भोपाल में आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन बनाने का काम फिर शुरू किया गया। संगठन को उम्मीद थी कि सरकार मांगों पर समय रहते निर्णय लेगी। अब महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 9 नवंबर तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन का अगला चरण प्रदेशव्यापी हाईवे जाम के रूप में होगा।
महासंघ की प्रमुख मांगें
1. हर महीने तय तारीख पर हो भुगतान: महासंघ का कहना है कि मध्यान्ह भोजन और साझा चूल्हा योजना की राशि मिलने में तीन से चार महीने तक की देरी हो जाती है। मांग है कि लाड़ली बहना योजना की तरह दोनों योजनाओं की राशि भी हर महीने एक निश्चित तारीख को समूहों के खातों में जमा की जाए।
2. समूहों को 100% राशि और खाद्यान्न मिले: संगठन के अनुसार, विद्यालयों में 100% बच्चों को भोजन कराने के बावजूद समूहों को केवल 50% राशि और खाद्यान्न मिलने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। महासंघ ने पूर्व व्यवस्था के अनुरूप पूरी राशि और खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है।
3. ऑनलाइन हाजिरी और वॉट्सऐप की अनिवार्यता खत्म हो: मध्यान्ह भोजन योजना में ऑनलाइन हाजिरी और वॉट्सऐप पर जानकारी देने की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई है। साथ ही, पोर्टल पर दर्ज छात्र संख्या के आधार पर समूहों को 100% राशि और खाद्यान्न देने की मांग उठाई गई है।
4. वर्षों से काम कर रहे समूहों को स्थायित्व मिले: महासंघ ने कहा कि लंबे समय से शासकीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन तैयार कर रहे महिला स्व सहायता समूहों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए। इसके लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि रोजगार और आजीविका को लेकर बनी रहने वाली अनिश्चितता खत्म हो।
5. भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पर लगे रोक: संगठन ने महिला एवं बाल विकास विभाग में कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पर रोक लगाने की मांग की है।
6. रसोइया बहनों के मानदेय, बीमा और सुरक्षा पर निर्णय: महासंघ ने समय पर भुगतान, नियमित खाद्यान्न उपलब्धता और रोजगार सुरक्षा के साथ रसोइया बहनों के मानदेय में वृद्धि, बीमा तथा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय लेने की मांग की है।
जिला स्तर पर आंदोलन की तैयारी का आह्वान
प्रदेश अध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने सभी जिला अध्यक्षों, संभागीय पदाधिकारियों, ब्लॉक अध्यक्षों, महिला स्व सहायता समूहों की संचालक बहनों और रसोइया बहनों से संगठन को मजबूत बनाने तथा आगामी आंदोलन की तैयारी में जुटने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि हजारों मेहनतकश महिलाओं के सम्मान, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। ये महिलाएं वर्षों से स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण से संबंधित कार्यों में योगदान दे रही हैं।
सरकार को 9 नवंबर तक का समय
महासंघ ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि 9 नवंबर 2026 तक सभी जायज मांगों पर ठोस निर्णय लेकर उनका निराकरण किया जाए। ऐसा नहीं होने पर 10 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में हाईवे जाम आंदोलन की घोषणा के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संगठन का कहना है कि आंदोलन की स्थिति बनने से पहले ही सरकार समस्याओं का समाधान करे, ताकि बच्चों के पोषण से जुड़े कार्य प्रभावित न हों और लंबे समय से सेवाएं दे रही महिला स्व सहायता समूहों की संचालक बहनों तथा रसोइया बहनों को न्याय मिल सके।








