
रिपोर्ट – दीपेश जैन
(कोतमा) मानसून की विदाई और अक्टूबर माह के अंतिम दौर में पहुँचने के बावजूद नगर पालिका कोतमा के केवई नदी स्थित फ़िल्टर प्लांट के पास बने स्टॉप डैम के गेट अभी तक बंद नहीं किए गए हैं। क्षेत्र में नदी के लगातार घटते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और आम जनता ने जल संकट की आशंका जताते हुए प्रशासन से अविलंब गेट बंद करने की पुरज़ोर अपील की है।
क्या हैं स्टॉप डैम के गेट बंद करने और खोलने के नियम?
जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के नियमानुसार, मानसूनी सीजन (वर्षा ऋतु) के दौरान पानी के अनियंत्रित बहाव और बाढ़ की स्थिति को रोकने के लिए स्टॉप डैम के गेट 15 जून से 30 जून के आसपास खोल दिए जाते हैं, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी बिना किसी रुकावट के आगे निकल सके।
वहीं, मानसून की समाप्ति और वर्षा ऋतु खत्म होने के बाद जल संचय (Water Conservation) करने के लिए नियमतः 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच स्टॉप डैम के गेटों को पूरी तरह से बंद कर देना अनिवार्य होता है ताकि गर्मियों और आगामी महीनों के लिए भू-जल स्तर को सुरक्षित रखा जा सके और पेयजल आपूर्ति सुचारू बनी रहे। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी गेट खुले रहना नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।
थर्मल पावर के बैराजों से भविष्य में बढ़ेगी चुनौती
स्थानीय जनता का यह भी कहना है कि अनूपपुर थर्मल पावर प्लांट द्वारा इसी केवई नदी पर लगभग 8 नए बैराज बनाए जाने की योजना है। इन बैराजों के निर्माण से भविष्य में नदी के प्राकृतिक बहाव और पानी की आवक में भारी रुकावट आएगी। ऐसी स्थिति में यदि वर्तमान स्टॉप डैम का पानी भी समय पर रोककर संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में कोतमा वासियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की अपील
कोतमा की आम जनता और प्रबुद्ध नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन व संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि निर्धारित नियमों का पालन करते हुए केवई नदी स्थित स्टॉप डैम के गेटों को तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए, ताकि समय रहते बहुमूल्य जल को बचाया जा सके।









