
रिपोर्टर धर्मेन्द्र पाटीदार
नीमच। प्रसिद्ध कथावाचक एवं संत श्री कृष्णानंद महाराज ने मनासा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान अयोध्या पुरी धर्मशाला में पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने धर्म, समाज, संस्कार, गौ सेवा और युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति सहित विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपने विचार रखे। संत श्री कृष्णानंद महाराज ने कहा कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराते हुए उसे परमार्थ और सेवा के मार्ग पर प्रेरित करना है। सेवा कार्यों और सामाजिक समरसता पर जोर महाराज ने बताया कि अजमेर में उनकी संस्था द्वारा नेत्रहीन बच्चों सहित जरूरतमंद लोगों के लिए आश्रम का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में सेवा और मानव कल्याण को विशेष महत्व दिया गया है।विभिन्न पंथों की मान्यताओं को लेकर उन्होंने कहा कि मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन धर्म का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना और मानव कल्याण की भावना को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कथा में किसी व्यक्ति के साथ अमीर-गरीब का भेद नहीं होता और सभी श्रद्धालु समान रूप से कथा के श्रोता होते हैं। वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रखे विचार मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर संत कृष्णानंद महाराज ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की आस्था का सम्मान होना चाहिए। व्यवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम श्रद्धालुओं को भी दर्शन एवं पूजा के दौरान सुविधा मिले। गौ सेवा और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की अपील सड़कों पर घूमने वाली गौमाता के विषय में उन्होंने समाज से अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गौ सेवा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और समाज को इसके प्रति जागरूक रहना चाहिए। युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने युवाओं को संस्कार, सत्संग एवं सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा राष्ट्र की शक्ति हैं और उनके चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। पत्रकार वार्ता के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश, विभिन्न धार्मिक पंथों में समरसता तथा सामाजिक कर्तव्यों सहित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर कथा आयोजन से जुड़े क्षेत्र के गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।









