
रिपोर्टर: अमित गुप्ता
कुरवाई। विजयादशमी के पावन अवसर पर क्षेत्र में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ किया जा रहा है। इस दौरान बेतवा नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा विसर्जन के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
कुरवाई के बेतवा नदी पुल घाट पर पूर्व में गणेश उत्सव के दौरान किए गए प्रतिमा विसर्जन के बाद बांस की सिल्लियां, पराली, वस्त्र, प्लास्टिक की थैलियां तथा अन्य पूजन सामग्री नदी के किनारों पर दिखाई दे रही है। ऐसे में नदी की स्वच्छता बनाए रखने और जलीय जीवन के संरक्षण के लिए विसर्जन के बाद बची सामग्री का उचित निस्तारण आवश्यक है।
इस संबंध में नगर परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती गीता मांझी से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था, उसी स्थान पर देवी प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जाएगा। इस विषय को लेकर नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रतिमा विसर्जन के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना आवश्यक है। इसके लिए कृत्रिम विसर्जन कुंडों की व्यवस्था, पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को प्रोत्साहन, पूजन सामग्री का पृथक संग्रहण और विसर्जन के बाद अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं।
बेतवा नदी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है। नदी की स्वच्छता बनाए रखने से स्थानीय नागरिकों, जलीय जीवों और आसपास के पर्यावरण को लाभ मिलेगा। इसके लिए नगर परिषद, प्रशासन, आयोजन समितियों और श्रद्धालुओं के सामूहिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
स्थानीय नागरिकों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से अपील की है कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान पर्यावरण संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही विसर्जन स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराकर नदी में पूजन सामग्री एवं अन्य अपशिष्ट जाने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि धार्मिक परंपराओं के साथ प्रकृति की स्वच्छता और संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।









