
रिपोर्टर – अनुराग तिवारी
भैंसदेही। नगर में आयोजित रामलीला के नवें दिन भगवान श्रीराम द्वारा रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और संजीवनी बूटी के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
रामलीला के प्रसंग के अनुसार, समुद्र तट पर भगवान श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना कर उसका नाम रामेश्वरम रखा। इसके बाद माता सीता की मुक्ति और लंका में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से श्रीराम ने अंगद को शांतिदूत बनाकर रावण के दरबार में भेजा।
अंगद ने रावण को समझाते हुए भगवान श्रीराम की शरण में आने और माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाने का संदेश दिया। उन्होंने युद्ध के परिणामों से अवगत कराते हुए शांति का मार्ग अपनाने की अपील की। इसी दौरान अंगद ने दरबार में अपना पैर जमाकर लंकापति रावण के योद्धाओं को उसे हिलाने की चुनौती दी। दरबार के सभी योद्धाओं ने प्रयास किया, लेकिन कोई भी अंगद का पैर नहीं हिला सका।
अंत में जब रावण स्वयं आगे बढ़ा, तब अंगद ने उसे संदेश दिया कि उनके चरण पकड़ने के बजाय प्रभु श्रीराम की शरण में जाकर अपना कल्याण करे। इसके बाद अंगद श्रीराम के शिविर में लौट आए और युद्ध की घोषणा के साथ आगे की कथा का मंचन हुआ।
आगे लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भीषण युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें मेघनाद के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। हनुमान जी उन्हें श्रीराम के पास लेकर आए। इसके बाद लंका से वैद्य सुषेण को बुलाया गया। वैद्य के निर्देश पर हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लेकर आए, जिससे लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई। इस प्रसंग का मंचन देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे।
रामलीला देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति, संवाद और जीवंत अभिनय दर्शकों को कथा से जोड़ रहे हैं।
रामलीला में अंगद की भूमिका आदर्श तिवारी ने निभाई, जबकि नल-नील की भूमिकाओं में उमेश नान्हे और दीपक नान्हे ने अभिनय किया। अंगद के प्रभावशाली अभिनय की दर्शकों ने सराहना की।









