
रिपोर्टर – धनंजय कुमार सिंह
सुकमा। लगातार हो रही बारिश के चलते सुकमा जिले के कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। शबरी नगर, बाजार पारा, बगीचा पारा और राजवाड़ा सहित अन्य इलाकों में पानी भरने के बाद जिला प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य तेज किए गए। जगदलपुर, मलकानगिरी और कोंटा की ओर जाने वाले मार्गों पर भी आवागमन प्रभावित हुआ। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं जनपद स्कूल में अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए। यहां प्रभावित यात्रियों एवं जरूरतमंद लोगों के लिए सुरक्षित ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।राहत शिविरों में शिक्षकों ने संभाली जिम्मेदारी राहत शिविरों में शिक्षकों की टीम दो शिफ्ट में व्यवस्थाओं को संभाल रही है। शिक्षक भोजन तैयार करने से लेकर शिविर में रह रहे लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रख रहे हैं। राहत कार्य में उनकी सक्रिय सहभागिता ने सेवा भावना और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। पहली शिफ्ट सुबह 7 बजे से दोपहर के भोजन तक रही, जिसमें सीएचवी राव, आकाश कन्नौजिया, अल्बर्ट टोपो, लोकेश नायक, फिरोज खान, किशोर साहू, कुलेश्वर साहू, दिनेश उसेंडी एवं संतोष कुंभलवार शामिल रहे। दूसरी शिफ्ट शाम 4 बजे से शुरू हुई, जिसमें रोहित टंडन, जीडी मानिकपुरी, ईश्वर लाल सहारे, संतोष रात्रे, किशोर पोटला, दिनेश वर्मा, देव ठाकुर, महेश सोरी एवं सोमला नायक ने जिम्मेदारी संभाली। राहत शिविर में मिल रही समय पर सुविधाएं जनपद स्कूल राहत शिविर में मौजूद अंजू मंडल ने प्रशासन एवं शिक्षकों द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि समय रहते राहत शिविर और भोजन की व्यवस्था होने से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान मिला। वहीं शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के राहत शिविर में पिछले तीन दिनों से रह रहे उपेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्हें समय पर नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है तथा ठहरने के लिए सुरक्षित व्यवस्था की गई है। उन्होंने प्रशासन एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समय पर राहत व्यवस्था से लोगों को मिला सुरक्षित आश्रय सुकमा के वरिष्ठ अधिवक्ता ने भी जिला प्रशासन की राहत व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों में समय रहते लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इससे प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान मिला और किसी अप्रिय घटना की स्थिति नहीं बनी।राहत शिविरों में प्रशासन के साथ शिक्षकों द्वारा निभाई जा रही जिम्मेदारी इस समय सुकमा में सामुदायिक सहयोग और सेवा भावना का उदाहरण बनी हुई है









