
रिपोर्टर – संजय मस्कर
करमाला, सोलापुर। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री कमलाभवानी देवी मंदिर, करमाला में शारदीय नवरात्र महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026, रविवार को घटस्थापना के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ, जिसका समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन अवसर पर होगा। दशहरे के दिन मंदिर में पारंपरिक सीमोल्लंघन उत्सव विशेष आकर्षण रहेगा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष माता के आगमन को गज यानी हाथी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में धन-धान्य और अच्छी वर्षा का शुभ संकेत माना जाता है।
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र श्री कमलाभवानी देवी मंदिर करमाला की कुलदेवी के रूप में प्रसिद्ध है। शारदीय नवरात्र इस मंदिर का प्रमुख वार्षिक उत्सव है। इन दिनों महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पहुंचते हैं। भक्त माता को साड़ी-चोली, खण-नारियल और सौभाग्य सामग्री अर्पित कर ओटी भरने की परंपरा निभाते हैं।
नवरात्र महोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत रोशनी और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
धार्मिक कार्यक्रमों से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर नवरात्र के दौरान मंदिर में महाभिषेक, पंचामृत पूजन, देवी की पालकी शोभायात्रा, भजन-कीर्तन, जागरण, गोंधळ और महाआरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पालकी शोभायात्रा में ढोल-ताशा, हलगी और लेझिम की प्रस्तुतियां उत्सव की शोभा बढ़ाती हैं। महिला भजन मंडलों और कीर्तन मंडलों द्वारा भी भक्ति कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।
विजयादशमी के दिन सीमोल्लंघन की पारंपरिक रस्म निभाई जाएगी। इस अवसर पर देवी को आपटे के पत्तों के रूप में सोना अर्पित किया जाएगा। मानकरी परिवारों द्वारा देवी को वस्त्र और आभूषण समर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाएगी। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु कुमकुम और अक्षत अर्पित कर माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे।
96 खंभों वाली वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है मंदिर ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1727 में रावराजे निंबालकर द्वारा करवाया गया था। मंदिर अपनी 96 खंभों वाली विशिष्ट वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर का एक कुआं मराठी फिल्म ‘सैराट’ की शूटिंग के कारण भी चर्चित रहा है।
मंदिर करमाला बस स्थानक से लगभग 2 किलोमीटर और सोलापुर शहर से करीब 123 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नवरात्र के दौरान यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
शारदीय नवरात्र और विजयादशमी के इस पावन अवसर पर श्री कमलाभवानी देवी मंदिर में आस्था, परंपरा और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिल रहा है। सीमोल्लंघन उत्सव के साथ नवरात्र महोत्सव का समापन धार्मिक उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच होगा।









