
रिपोर्ट – टेलू राम कश्यप,
गोहरापदर। संतान के स्वस्थ, सुखमय एवं सुदीर्घ जीवन की मंगलकामना को लेकर गोहरापदर अंचल में कमरछठ (हलषष्ठी) का पर्व श्रद्धा, भक्ति और मातृस्नेह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने विधि-विधानपूर्वक व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती एवं षष्ठी माता की पूजा-अर्चना की। साथ ही अपनी संतानों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। गोहरापदर में शिक्षिका ललिता तिवारी के निवास पर क्षेत्र की महिलाएं एकत्रित हुईं। महिलाओं ने पारंपरिक विधि से सगरी का निर्माण कर उसमें जल भरा। इसके साथ बेर, पलाश, महुआ और कांसी की डालियां अर्पित कर पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान शिव-पार्वती एवं षष्ठी माता का स्मरण करते हुए कमरछठ व्रत की कथा का सामूहिक श्रवण किया गया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और पारिवारिक मंगलकामना का सुंदर वातावरण रहा। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व मातृत्व की श्रद्धा और संतान के प्रति अटूट स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इसी तिथि को भगवान बलराम की जन्मजयंती भी मनाई जाती है, जिसके चलते इस पर्व को हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। छत्तीसगढ़ में यह पर्व स्थानीय लोकपरंपराओं और मान्यताओं के अनुरूप विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।कमरछठ की पूजा में सगरी का विशेष महत्व माना जाता है। घर के आंगन में स्थान तैयार कर सगरी बनाई जाती है, जिसमें जल भरकर प्रकृति से जुड़ी विभिन्न वनस्पतियों की डालियां रखी जाती हैं। इसके बाद माताएं सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर व्रत कथा का श्रवण करती हैं और संतान के सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की मंगलकामना करती हैं। यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति और लोकसंस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है। व्रत की परंपरा के अनुसार माताएं हल से तैयार किए गए अन्न का सेवन नहीं करतीं। इसके स्थान पर प्राकृतिक रूप से उगे पसहर चावल तथा छह प्रकार की भाजियों का सेवन करने की परंपरा है। इस लोकाचार में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जीवनशैली, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और लोकविश्वासों की सुंदर झलक देखने को मिलती है। गोहरापदर में आयोजित कमरछठ व्रत एवं कथा पूजन में ममता तिवारी, ललिता तिवारी, खुशबू तिवारी, आशा मिश्रा, तमन्ना सिन्हा, मनीषा कश्यप, सोनम सिन्हा, सत्यवती सिन्हा, धामनबाई साहू, सुनीता कश्यप, त्रिदेवी साहू, एकता सिन्हा, संतोषी यादव, चंद्रिका प्रधान, टिकेश्वर ठाकुर, हिरंदी पाण्डेय, गायत्री पाण्डेय, अनीता पाण्डेय, पुष्पा नामदेव एवं पुष्पा जालेश सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभाई। पूरे आयोजन में माताओं की आस्था, पारिवारिक सुख-समृद्धि की मंगलकामना और छत्तीसगढ़ की जीवंत लोकसंस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। धार्मिक वातावरण में संपन्न कमरछठ पूजा ने लोकपर्वों की सांस्कृतिक महत्ता को उजागर किया। ऐसे आयोजन पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक एकजुटता को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।









