
रिपोर्ट: विनोद कुमार
सीधी। जनपद पंचायत मझौली क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में पदस्थ रहे एक पंचायत सचिव से संबंधित शिकायत का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने कमिश्नर रीवा संभाग को आवेदन देकर संबंधित सचिव के कार्यकाल, पंचायत योजनाओं में हुए भुगतानों तथा संपत्तियों की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूर्व में भी इस संबंध में आवेदन दिया गया था, लेकिन अपेक्षित जांच नहीं हो सकी। अब दोबारा आवेदन देकर दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की जांच की मांग की गई है। 2008-09 से विभिन्न पंचायतों में पदस्थापना शिकायत के अनुसार ताला निवासी हिमांशू गुप्ता, पिता रंगदेव गुप्ता, वर्ष 2008-09 में पंचायत सचिव के पद पर नियुक्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग ग्राम पंचायतों में सचिव एवं अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य किया। शिकायत में ताला में करीब छह वर्ष, नौढ़िया में तीन वर्ष, पोड़ी में तीन वर्ष तथा बोदारी टोला सहित तिलवारी और खंतरा पंचायत में पदस्थापना एवं अतिरिक्त प्रभार का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित पंचायतों में विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं के तहत हुए कार्यों एवं भुगतानों की जांच कराने का अनुरोध किया है। मनरेगा और पंचपरमेश्वर के रिकॉर्ड की जांच की मांग शिकायत में मनरेगा के मस्टर रोल तथा पंचपरमेश्वर योजना से जुड़े बिल-वाउचर और भुगतानों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने इन सभी रिकॉर्ड का परीक्षण कराने की मांग की है। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।संपत्तियों के संबंध में भी जांच का अनुरोध शिकायत में संबंधित सचिव की करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने का दावा किया गया है। इसमें तीन स्कूल बस, दो बोलेरो वाहन, एक अल्टो कार, एक सेल्टोस कार, ट्रैक्टर-ट्रॉली, सेंटिंग सामग्री, भूमि, तीन मंजिला निजी हायर सेकेंडरी स्कूल, मकान और फार्म हाउस सहित अन्य संपत्तियों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित व्यक्ति की वैध आय और वर्तमान संपत्तियों का तुलनात्मक परीक्षण कराने की मांग की है। संपत्तियों का वास्तविक मूल्य, स्वामित्व तथा आय के स्रोत की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। दोबारा आवेदन देकर जांच की मांग शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले को लेकर पहले भी अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था। अब दोबारा शिकायत देकर सभी संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने का अनुरोध किया गया है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।इन बिंदुओं पर जांच का अनुरोध शिकायतकर्ता ने पंचायत सचिव की नियुक्ति से अब तक उनके द्वारा संभाली गई ग्राम पंचायतों के मनरेगा मस्टर रोल, भुगतान रिकॉर्ड, पंचपरमेश्वर के बिल-वाउचर, बैंक भुगतान, निर्माण कार्यों, पंचायत परिसंपत्तियों और संबंधित संपत्तियों का परीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही वैध आय और वर्तमान संपत्ति का तुलनात्मक आकलन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है। अब संबंधित विभाग और जिला प्रशासन द्वारा शिकायत पर की जाने वाली जांच से ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।









