
रिपोर्टर -काशिनाथ भंडारी
खेतिया। नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पशुधन पर्व पोला श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कृषि कार्य में पशुधन के महत्वपूर्ण योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाले इस पर्व पर किसानों ने अपने बैलों को आकर्षक ढंग से सजाकर उनकी पूजा-अर्चना की। पर्व के अवसर पर नगर में उत्सवी वातावरण दिखाई दिया और जगह-जगह सजे-धजे बैल आकर्षण का केंद्र रहे।
परंपरा के अनुसार किसानों ने बैलों को सजाकर घरों के सामने पूजन किया। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ बैलों को नगर भ्रमण कराया गया। अनेक किसान अपने सजे हुए बैलों के साथ हनुमान चौक स्थित प्राचीन श्री बजरंगबली मंदिर की परिक्रमा करने भी पहुंचे।
पोला पर्व को लेकर बाजार में भी अच्छी चहल-पहल रही। पशुधन की सजावट के लिए आवश्यक सामग्री की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी गई। गुड़, शक्कर, चना दाल और नारियल सहित पूजन सामग्री की भी अच्छी बिक्री हुई। कुम्हारों द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के बैलों की भी किसानों और नागरिकों ने खरीदारी की।
आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग बढ़ने के बावजूद पशुधन का महत्व आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती-किसानी में बना हुआ है।
पोला पर्व केवल परंपरा और उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व भी है। किसानों के जीवन में पशुधन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। यही कारण है कि पोला के अवसर पर बैलों को सजाकर उनकी पूजा करने की परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साहपूर्वक निभाई जा रही है।









