
रिपोर्टर मोहम्मद अय्यूब शीशगर
मेघनगर। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अंतर्गत श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर में धर्म आराधना का क्रम जारी है। महापर्व के तीसरे दिन दीपक एकासना का आयोजन हुआ, जिसमें 60 से अधिक श्रद्धालुओं ने तप आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। दीपक एकासना का लाभ कमलेशजी महावीरजी भंडारी परिवार ने लिया। आयोजन की व्यवस्था परिषद परिवार द्वारा संभाली गई। साध्वीश्रीजी ने बताए श्रावक के कर्तव्य धर्मसभा में पूज्य साध्वीश्रीजी ने श्रावक के कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रुत पूजा, देवद्रव्य वृद्धि, शासन प्रभावना एवं उद्यापन आदि विषयों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जिनवाणी के प्रति श्रद्धा और ज्ञान की आराधना श्रुत पूजा का महत्वपूर्ण अंग है। देवद्रव्य की वृद्धि एवं जिनशासन की प्रभावना के कार्यों में सहभागी बनना भी श्रावक के महत्वपूर्ण दायित्वों में शामिल है। धार्मिक आराधनाओं के उद्यापन से धर्म के प्रति श्रद्धा और अनुमोदना का भाव बढ़ता है। उन्होंने श्रावकों को इन कर्तव्यों को जीवन में आचरण के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी। महापर्व के तीसरे दिन परमात्मा की सुंदर अंगरचना का लाभ दिलीपकुमारजी, गौरवजी, अंकितजी, मंत्र कोठारी परिवार ने लिया। प्रवचन की प्रभावना का लाभ दिलीपकुमारजी, गौरवजी, अंकितजी, मंत्र कोठारी परिवार; राजेन्द्रजी, प्रमोदजी, अंकितजी, रिधान लुणावत परिवार तथा सोहनलालजी, राहुलजी, रिदित, दीर्घ रुनवाल परिवार ने लिया। साध्वीश्री मैत्रीकलाश्रीजी एवं निरंजनकलाश्रीजी का आगमन पर्युषण महापर्व के महत्वपूर्ण प्रसंग कल्पसूत्र वाचन का शुभारंभ आज होगा। कल्पसूत्र वोहराने का लाभ श्रीमती स्नेहलता मनोहरलालजी हीरालालजी कावड़िया परिवार ने लिया है। कल्पसूत्र को ढोल-बाजों के साथ लाभार्थी कावड़िया परिवार के निवास स्थान ‘जयंत-राज’ ले जाया गया। इस अवसर पर लाभार्थी परिवार के साथ श्रीसंघ के सदस्य तथा पूज्य साध्वीश्री मैत्रीकलाश्रीजी म.सा. एवं निरंजनकलाश्रीजी म.सा. भी पधारे। निवास स्थान पर विधि-विधानपूर्वक कल्पसूत्र की स्थापना कर चैत्यवंदन की विधि संपन्न की गई।अष्टप्रकारी पूजन के बाद होगा वाचन आज प्रातः 8 बजे लाभार्थी कावड़िया परिवार द्वारा कल्पसूत्र को श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर में लाकर पूज्य साध्वीजी भगवंत को वोहराया जाएगा। इसके पश्चात कल्पसूत्र की अष्टप्रकारी पूजन, वासक्षेप पूजन एवं आरती की जाएगी और पावन कल्पसूत्र वाचन का शुभारंभ होगा। कल्पसूत्र की आरती का लाभ पंकजजी हीरालालजी राका परिवार ने लिया है। तीसरे दिन प्रवचन, अंगरचना, दीपक एकासना और कल्पसूत्र आगमन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से श्रीसंघ में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।









