
रिपोर्टर – लखन ठाकुर
चोली। महेश्वर से करीब 13 किलोमीटर तथा नर्मदा तट मंडलेश्वर से लगभग 9 किलोमीटर दूर महू-मंडलेश्वर-जाम मार्ग पर स्थित ग्राम चोली धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अपनी विशेष पहचान रखता है। गांव में स्थित षष्टानंद सिद्धेश्वर गणेश मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर में विराजमान भगवान गणेश की करीब 11 फीट ऊंची विशाल पाषाण प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। एक ही पाषाण शिला से बनी विशाल प्रतिमा मंदिर की प्रमुख विशेषता भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार यह प्रतिमा एक ही पाषाण शिला से निर्मित है। छह भुजाओं वाली नृत्य मुद्रा में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा प्राचीन शिल्पकला की सुंदर झलक प्रस्तुत करती है। प्रतिमा की विशालता, मुद्रा और बारीक नक्काशी इसे विशेष बनाती है। इतिहास एवं पुरातत्व से जुड़े विवरणों में चोली क्षेत्र की प्राचीन मूर्तिकला को प्रतिहार-परमार कालीन कला परंपरा से जोड़े जाने का उल्लेख मिलता है। प्रतिमा के निर्माण का निश्चित वर्ष और शिल्पकार का नाम उपलब्ध नहीं है, हालांकि इसकी कलात्मक बनावट क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करती है।
आस्था से जुड़ी हैं अनेक मान्यताएं स्थानीय श्रद्धालुओं में भगवान षष्टानंद सिद्धेश्वर गणेश के प्रति गहरी आस्था है। मान्यता है कि मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और प्रार्थना करने से भगवान गणेश भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक वातावरण रहता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। 14 सितंबर से गणेश उत्सव का शुभारंभ ग्राम चोली स्थित षष्टानंद सिद्धेश्वर गणेश मंदिर में 14 सितंबर से गणेश उत्सव का शुभारंभ होगा। उत्सव को लेकर मंदिर परिसर एवं ग्रामीण क्षेत्र में तैयारियां की जा रही हैं। उत्सव के दौरान भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना, आरती एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आसपास के गांवों के साथ ही दूर-दराज के श्रद्धालुओं के भी चोली पहुंचने की उम्मीद है। प्राचीन धार्मिक विरासत से बनी चोली की पहचान चोली षष्टानंद सिद्धेश्वर गणेश मंदिर के साथ-साथ अनेक प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। गांव और आसपास के क्षेत्र में मौजूद प्राचीन मंदिर, मूर्तियां एवं अन्य धार्मिक स्थल नर्मदा अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। महेश्वर और मंडलेश्वर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरों के बीच स्थित चोली में धार्मिक पर्यटन की भी व्यापक संभावनाएं हैं। प्राचीन धरोहरों के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास से चोली को नर्मदा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में पहचान मिल सकती है। चोली की 11 फीट ऊंची षष्टानंद सिद्धेश्वर गणेश की विशाल पाषाण प्रतिमा आज भी क्षेत्र की प्राचीन कला, आस्था और सांस्कृतिक विरासत की विशेष पहचान बनी हुई है।









