
रिपोर्ट: उषा मेहरा
वाड्रफनगर, 23 सितंबर 2026। शासकीय रानी दुर्गावती महाविद्यालय, वाड्रफनगर में करमा पूजा एवं प्रकृति पर्व का आयोजन उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक सद्भाव की परंपराओं से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम के दौरान करमा वृक्ष की पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियां देकर करमा पर्व की सांस्कृतिक महत्ता को प्रदर्शित किया। इस दौरान महाविद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल रहा और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण, वृक्षों के संवर्धन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि करमा पर्व प्रकृति और मानव जीवन के पारस्परिक संबंध को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण लोकपर्व है। यह भाई-बहन के प्रेम, सामुदायिक एकता और सामाजिक सद्भाव की भावना को भी मजबूत करता है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने करमा पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को अपनी लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।









