
रिपोर्टर लखन
महेश्वर। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार को महिष्मति क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक विरासत से परिचित कराने और धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नौ दुर्गा दर्शन यात्रा का शुभारंभ किया गया। सुबह 8 बजे भवानी माता चौक से शुरू हुई इस यात्रा में श्रद्धालुओं ने महेश्वर सहित चोली, आशापुर और जामघाट क्षेत्र के प्राचीन देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन किया।
यात्रा मार्गदर्शक डॉ. रमेशचंद्र उपाध्याय ने बताया कि यात्रा के दौरान महेश्वर में भवानी माता, हिंगलाज माता, रेणुका माता, भद्रकाली माता, महालक्ष्मी माता और लालबाई-फूलबाई माता के दर्शन किए गए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने चोली स्थित अपर्णा माता, आशापुर की आशापुरी माता और जाम दरवाजा क्षेत्र की विंध्यवासिनी पार्वती माता के मंदिर में परिवार सहित दर्शन-पूजन किया।
नवरात्रि में शक्ति आराधना के विशेष महत्व के बीच यह यात्रा श्रद्धालुओं को क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों की धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराने का माध्यम बनी। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की धार्मिक विरासत के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
धार्मिक विरासत और पर्यटन की अपार संभावनाएं ऐतिहासिक माहिष्मती नगरी के रूप में प्रसिद्ध महेश्वर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान अहिल्या किले तथा नर्मदा घाटों के साथ-साथ यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिरों, नौ नारायण, विनायक मंदिरों और देवी स्थलों से भी जुड़ी है। क्षेत्र में 84 महादेव, नौ नारायण, चार धाम, आठ विनायक और नौ शक्ति मंदिरों से संबंधित धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।
इन धार्मिक स्थलों को व्यवस्थित रूप से पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण, नई पीढ़ी को स्थानीय इतिहास से परिचित कराने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं हैं। नौ दुर्गा दर्शन यात्रा इसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
श्रद्धालुओं की रही सहभागिता यात्रा में डॉ. रमेशचंद्र उपाध्याय, पर्यावरणविद् राघव उपाध्याय, नर्मदा आरती मंडल एवं नर्मदा पुराण मंडल से राकेश शर्मा, रेवाराम कोहरे, पवन तवर, दिलीपसिंह चौहान, मुकेश तवर और जगदीश चौहान शामिल हुए।
इसके अलावा हनुमान मंदिर आरती मंडल, श्रीनगर से बाबूलाल वर्मा, राधेश्याम डोंगरे, अखिलेश लाड़, मांगीलाल पटेल, सतीश सोलंकी सहित अनेक श्रद्धालुओं ने परिवार सहित यात्रा में सहभागिता की। यात्रा के माध्यम से महिष्मति क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और प्राचीन देवी स्थलों के महत्व को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।









