
रिपोर्टर – नारायण मारू
लाबरिया। ग्राम लाबरिया में स्वर्गीय श्रीमती भूरी बाई, पत्नी स्वर्गीय भेरूलाल जी चौधरी, के दशाकर्म, तेरहवीं एवं पगड़ी रस्म के अवसर पर मारू कुमावत समाज द्वारा धार्मिक आस्था और समाजसेवा से जुड़ी अनुकरणीय पहल की गई। इस अवसर पर चौधरी परिवार ने धार्मिक स्थलों, गौशालाओं एवं सामाजिक संस्थाओं के सहयोग के लिए विभिन्न कार्य किए और समाज के सामने सेवा व सहयोग की प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की।
पगड़ी रस्म का कार्यक्रम समाज के वरिष्ठजनों चौधरी शंकरलाल जी, प्रकाश जी, दयाराम जी, रामेश्वर जी, मारू रामचंद्र जी, रमेश जी, कैलाश जी बागरेचा, भागीरथ जी, नारायण जी सहित बड़ी संख्या में समाजजनों, सगे-संबंधियों एवं इष्ट-मित्रों की उपस्थिति में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
मंदिर में चांदी का छत्र अर्पित इस अवसर पर स्वर्गीय भूरी बाई के सुपुत्र राजू चौधरी, लालू चौधरी एवं विकास चौधरी तथा पौत्र अर्पित चौधरी और शुभम चौधरी ने ब्राह्मण दक्षिणा, सामाजिक भोजन प्रसादी एवं अन्नदान के साथ कई धर्मार्थ कार्य किए।
परिवार की ओर से श्री राम मंदिर (राधा-कृष्ण, राम-जानकी मंदिर) में चांदी का छत्र अर्पित किया गया। वहीं, मारू कुमावत धर्मशाला में सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों के लिए आवश्यक बर्तन भेंट किए गए, जिससे समाज के विभिन्न आयोजनों में सुविधा मिल सकेगी।
19 धार्मिक स्थलों को 21 हजार रुपये की सहयोग राशि ग्राम के विभिन्न मंदिरों, गौशालाओं एवं धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और रखरखाव में सहयोग के उद्देश्य से कुल 19 स्थानों पर 1,100-1,100 रुपये की राशि भेंट की गई। इस प्रकार कुल 20,900 रुपये की सहयोग राशि प्रदान की गई, जिसे लगभग 21 हजार रुपये बताया गया।
इस सहयोग राशि का उपयोग धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं, रखरखाव एवं आवश्यक विकास कार्यों में किया जाएगा। परिवार की इस पहल से गांव के धार्मिक और सामाजिक संस्थानों को सहयोग मिलेगा।
समाजसेवा और धार्मिक परंपरा का सुंदर संगम कार्यक्रम का संचालन ऊर्जावान उपसरपंच नारायण मारू (भट्ट साहब) द्वारा किया गया। उपस्थित समाजजनों ने चौधरी परिवार के इस सेवाभावी कार्य की सराहना की और समाज के उत्थान के लिए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों एवं सहयोगात्मक प्रयासों को जारी रखने की प्रेरणा दी।
इस पहल ने यह संदेश दिया कि पारिवारिक संस्कारों और धार्मिक परंपराओं के साथ समाजसेवा, अन्नदान तथा सार्वजनिक स्थलों के विकास में योगदान देना भी महत्वपूर्ण है। मारू कुमावत समाज की इस अनुकरणीय पहल से सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और सेवा भावना को नई प्रेरणा मिली।









