
रिपोर्टर – विशाल बागमार
खरगोन, करही। निमाड़ क्षेत्र में कपास की अच्छी पैदावार और बाजार में मिल रहे बेहतर भाव से किसानों में उत्साह का माहौल है। कपास उत्पादन के लिए प्रसिद्ध निमाड़ को सफेद सोने का कटोरा कहा जाता है। इस वर्ष क्षेत्र में कपास की पैदावार के साथ ही किसानों को बाजार में अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। गुरुवार को करही में बन्डेरा के किसान महेश का कपास 9,800 रुपये प्रति क्विंटल के उच्चतम भाव पर बिका। इस तरह कपास का भाव 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल के आंकड़े से महज 200 रुपये दूर रह गया है। रुई और कपास्या के भाव में तेजी को देखते हुए जल्द ही कपास के भाव दस हजारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस वर्ष गुजरात और महाराष्ट्र में कपास उत्पादन में कमी की संभावना के चलते बाजार में मांग बनी हुई है। इन राज्यों के व्यापारी भी मध्यप्रदेश से कपास की खरीदी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजार को समर्थन मिल रहा है। वहीं, रुई और कपास्या की मांग के चलते स्पिनिंग मिलों और कपास्या मिलों की खरीदारी में भी रुचि बनी हुई है। पिछले 15 दिनों से मिलों की ओर से लगातार बढ़े हुए भाव पर खरीदी की जा रही है, जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है।
कपास के लिए भारतीय कपास निगम (सीसीआई) का समर्थन मूल्य 8,200 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है। वर्तमान में बाजार भाव समर्थन मूल्य से अधिक मिलने के कारण किसान खुले बाजार में अपनी उपज बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सीसीआई में खरीदी के लिए पंजीकरण, नमी की जांच और गुणवत्ता संबंधी निर्धारित मापदंडों की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। ऐसे में बाजार में बेहतर भाव मिलने से किसानों को अपनी उपज का अच्छा मूल्य प्राप्त हो रहा है।
निमाड़ के किसानों को पैदावार और भाव, दोनों का लाभ ग्राम होदड़िया के किसान निर्मल पाटीदार ने बताया कि उनके पास 10 बीघा जमीन है। पिछले वर्ष उन्हें कुल 17 क्विंटल कपास प्राप्त हुआ था, जिसे औसतन 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचा गया था। वहीं, इस वर्ष अब तक 35 क्विंटल कपास घर आ चुका है और लगभग 15 क्विंटल कपास की और पैदावार होने की उम्मीद है। वर्तमान बाजार भाव को देखते हुए उन्हें औसतन 9,000 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य मिलने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष मानसून जल्दी विदा होने के बाद बारिश नहीं हुई। इसके बावजूद क्षेत्र में सिंचित कपास की फसल से अच्छी पैदावार प्राप्त हुई है। उत्पादन और बाजार भाव में सुधार से किसानों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
कपास बाजार में तेजी के प्रमुख कारण इंदौर के कॉटन व्यवसायी स्वप्निल अग्रवाल टोनी ने बताया कि पिछले पांच दिनों में कपास बाजार में 5 हजार रुपये प्रति खंडी की तेजी दर्ज की गई है। उनके अनुसार, पिछले वर्ष भारत में लगभग 310 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष उत्पादन करीब 250 लाख गांठ रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। उत्पादन में संभावित कमी बाजार में तेजी का प्रमुख कारण है।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे भाव के चलते पॉलिएस्टर और कॉटन के भाव भी प्रभावित हो रहे हैं। इससे रुई के बाजार को भी समर्थन मिल रहा है। मांग और उत्पादन के बीच बन रहे अंतर के चलते कपास बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है।
कुल मिलाकर, निमाड़ क्षेत्र में कपास की अच्छी पैदावार और बाजार में मिल रहे आकर्षक भाव किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। करही में कपास का भाव 9,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने से अब किसानों और व्यापारियों की निगाहें 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल के आंकड़े पर टिकी हैं।









